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भावों में ग्रह · केंद्र

चौथे भाव में चंद्र

Moon · सुख भाव

चंद्र मन, माता, भावनाएँ और शांति का कारक है। चौथे भाव, जिसे सुख भाव कहते हैं, घर, माता और सुख को दर्शाता है। जब चंद्र यहाँ होता है, तो इन विषयों पर उसका रंग चढ़ता है।

चौथे भाव में शुभ ग्रह आरामदायक घर, वाहन, स्नेही माता और मन की शांति देता है।

चौथे भाव केंद्र है, कुंडली का स्तंभ, इसलिए यहाँ का ग्रह अपने फल खुलकर और प्रबलता से देता है।

चौथे भाव में चंद्र को दिग्बल मिलता है, जो यहाँ उसे स्पष्ट रूप से बलवान बनाता है।

चंद्र यहाँ सबसे अच्छे फल तब देता है जब वह वृषभ में उच्च, अपनी राशि (कर्क) में या मित्र राशि में हो, और अस्त न हो।

यदि चंद्र वृश्चिक में नीच, अस्त या पाप ग्रहों से पीड़ित हो तो फल कमज़ोर होते हैं।

गोचर में

जब चंद्र आपकी चंद्र राशि से चौथे भाव में गोचर करता है, तो पारंपरिक रूप से उस समय अधिक सावधानी चाहिए।

कोई भी एक स्थिति अकेले नहीं पढ़ी जाती: राशि, दृष्टि, युति, दशा और पूरी कुंडली परिणाम बदलते हैं।

अपनी कुंडली में चंद्र किस भाव में है, उसके बल और स्थिति के साथ देखें।
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