मुहूर्त
विवाह मुहूर्त 2026
2026 में 18 शुभ तिथियाँ, हर दिन के सबसे अच्छे समय के साथ।
विवाह मुहूर्त के लिए शुभ तिथि और नक्षत्र (जैसे रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, तीनों उत्तरा और रेवती), अच्छा वार, विष्टि करण न हो, और चातुर्मास, खरमास, होलाष्टक तथा गुरु या शुक्र के अस्त से बाहर हो।
जनवरी 2026 0
इस महीने कोई उपयुक्त तिथि नहीं।
फ़रवरी 2026 2
- 19 फ़र॰ गुरु20:52 – 06:55 (+1)शुक्ल तृतीया · उत्तरा भाद्रपद
- 20 फ़र॰ शुक्र06:55 – 08:20शुक्ल तृतीया · उत्तरा भाद्रपद
मार्च 2026 0
इस महीने कोई उपयुक्त तिथि नहीं।
अप्रैल 2026 4
- 20 अप्रैल सोम04:35 – 05:50शुक्ल तृतीया · रोहिणी
- 20 अप्रैल सोम05:50 – 07:28शुक्ल तृतीया · रोहिणी
- 26 अप्रैल रवि05:45 – 12:19शुक्ल दशमी · मघा
- 29 अप्रैल बुध05:42 – 07:20शुक्ल त्रयोदशी · हस्त
मई 2026 3
- 1 मई शुक्र12:18 – 15:37शुक्ल पूर्णिमा · स्वाति
- 3 मई रवि07:10 – 12:18कृष्ण द्वितीया · अनुराधा
- 6 मई बुध08:57 – 10:37कृष्ण पंचमी · मूल
जून 2026 5
- 19 जून शुक्र12:22 – 14:52शुक्ल पंचमी · मघा
- 21 जून रवि09:31 – 11:20शुक्ल सप्तमी · उत्तरा फाल्गुनी
- 24 जून बुध14:08 – 18:13शुक्ल दशमी · स्वाति
- 26 जून शुक्र19:16 – 22:23शुक्ल द्वादशी · अनुराधा
- 29 जून सोम16:18 – 04:03 (+1)शुक्ल पूर्णिमा · मूल
जुलाई 2026 1
- 1 जुल॰ बुध08:55 – 10:40कृष्ण द्वितीया · उत्तराषाढ़ा
अगस्त 2026 0
इस महीने कोई उपयुक्त तिथि नहीं।
सितंबर 2026 0
इस महीने कोई उपयुक्त तिथि नहीं।
अक्टूबर 2026 0
इस महीने कोई उपयुक्त तिथि नहीं।
नवंबर 2026 2
- 25 नव॰ बुध13:27 – 16:51कृष्ण प्रतिपदा · रोहिणी
- 26 नव॰ गुरु10:49 – 13:16कृष्ण द्वितीया · मृगशिरा
दिसंबर 2026 1
- 12 दिस॰ शनि03:04 – 07:04शुक्ल तृतीया · उत्तराषाढ़ा
समय नई दिल्ली के लिए है और पंचांग नियमों (तिथि, नक्षत्र, वार, योग, करण और राहु काल से बचाव) पर आधारित है। महत्वपूर्ण कार्य के लिए संबंधित लोगों की कुंडली से भी मिलान करें।
अपने शहर के लिए, परिवार की कुंडलियों से मिलाकर मुहूर्त खोजें।
मुहूर्त खोजेंअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2026 में विवाह मुहूर्त की तिथियाँ कौन सी हैं?
2026 में 18 शुभ तिथियाँ हैं; सबसे अधिक जून, अप्रैल, और मई में हैं।
ये मुहूर्त कैसे चुने गए हैं?
विवाह मुहूर्त के लिए शुभ तिथि और नक्षत्र (जैसे रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, तीनों उत्तरा और रेवती), अच्छा वार, विष्टि करण न हो, और चातुर्मास, खरमास, होलाष्टक तथा गुरु या शुक्र के अस्त से बाहर हो।