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काल सर्प दोष

काल सर्प दोष क्या है, इसके 12 प्रकार, कैसे जाँचा जाता है, और पारंपरिक उपाय।

काल सर्प दोष क्या है?

काल सर्प दोष (या योग) तब बनता है जब सूर्य से शनि तक सभी सात ग्रह राहु-केतु अक्ष के एक ओर हों। राहु सर्प का मुख और केतु पूँछ है, और ग्रह इनके बीच बँधे माने जाते हैं।

कैसे जाँचा जाता है?

सभी ग्रहों की स्थिति राहु और केतु से मिलाई जाती है। यदि हर ग्रह राहु से केतु (या केतु से राहु) के चाप में हो तो योग है। एक भी ग्रह बाहर हो तो यह आंशिक या अनुपस्थित है।

राहु के भाव के अनुसार इसके 12 नाम हैं: अनंत, कुलिक, वासुकि, शंखपाल, पद्म, महापद्म, तक्षक, कर्कोटक, शंखचूड़, घातक, विषधर और शेषनाग।

प्रभाव

इसे संघर्ष, देरी और अचानक उतार-चढ़ाव से जोड़ा जाता है, विशेषकर राहु और केतु की दशा में। प्राचीनतम शास्त्रों में इसका उल्लेख नहीं है, और कई प्रसिद्ध, सफल लोगों की कुंडली में यह है; इसका प्रभाव बाकी कुंडली पर निर्भर है।

कब कमज़ोर होता है?

जब कोई ग्रह राहु या केतु के साथ समान अंशों में हो, केंद्र में प्रबल शुभ ग्रह हों, या राहु 3, 6 या 11 जैसे अनुकूल भाव में हो, तब इसे कमज़ोर या निरस्त माना जाता है।

उपाय

त्र्यंबकेश्वर या उज्जैन में काल सर्प पूजा; सोमवार और नाग पंचमी को भगवान शिव की पूजा और दूध अर्पण; महामृत्युंजय मंत्र का जप; और राहु-केतु मंत्रों का जप।

कोई भी एक स्थिति अकेले नहीं पढ़ी जाती: राशि, दृष्टि, युति, दशा और पूरी कुंडली परिणाम बदलते हैं।

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