दोष
शनि साढ़े साती
साढ़े साती क्या है, इसके तीन चरण, हर राशि पर असर, और पारंपरिक उपाय।
साढ़े साती क्या है?
साढ़े साती आपकी चंद्र राशि से 12वीं, पहली और दूसरी राशि पर शनि का साढ़े सात वर्ष का गोचर है। हर चरण लगभग ढाई वर्ष का होता है। यह लगभग हर 30 वर्ष में लौटती है, इसलिए अधिकतर लोग इससे दो या तीन बार गुज़रते हैं।
तीन चरण
चढ़ती साढ़े साती (चंद्र से 12वें में शनि): खर्च, यात्रा, नींद और परिवेश में बदलाव। शिखर (चंद्र पर शनि): मन, स्वास्थ्य और निजी जीवन पर दबाव, पर परिपक्वता भी। उतरती (2रे में शनि): परिवार, धन और वाणी, धीरे-धीरे राहत के साथ।
प्रभाव
यह परिश्रम, ज़िम्मेदारी और कर्म की सीख का समय है। जिनकी कुंडली में शनि बलवान या शुभ स्थान पर हो, या जिनका लग्न शुक्र या शनि का हो, उनके लिए यह अक्सर सफलता और स्थिरता लाती है। इसका फल चल रही दशा पर भी निर्भर है।
कब हल्की होती है?
जब शनि आपकी कुंडली में उच्च, स्वराशि या योगकारक हो, गुरु की चंद्र पर दृष्टि हो, या अनुकूल दशा चल रही हो, तब यह हल्की रहती है।
उपाय
हनुमान और भगवान शिव की पूजा; शनिवार को हनुमान चालीसा या शनि स्तोत्र का पाठ; पीपल के नीचे तिल के तेल का दीपक; शनिवार को काले तिल, सरसों का तेल, लोहा या काला वस्त्र दान; और बुज़ुर्गों, श्रमिकों व ज़रूरतमंदों की सेवा।
कोई भी एक स्थिति अकेले नहीं पढ़ी जाती: राशि, दृष्टि, युति, दशा और पूरी कुंडली परिणाम बदलते हैं।