शनि साढ़े साती
सिंह राशि की साढ़े साती
सिंह पर अभी साढ़े साती नहीं है। अगली 13 जुलाई 2034 से शुरू होगी।
सभी साढ़े साती काल
| अवधि · चरण |
|---|
| 6 सित॰ 2004 – 4 अग॰ 2012 चढ़ती (चंद्र से 12वाँ) 6 सित॰ 2004 – 13 जन॰ 2005 चढ़ती (चंद्र से 12वाँ) 26 मई 2005 – 1 नव॰ 2006 शिखर (चंद्र पर) 1 नव॰ 2006 – 10 जन॰ 2007 चढ़ती (चंद्र से 12वाँ) 10 जन॰ 2007 – 16 जुल॰ 2007 शिखर (चंद्र पर) 16 जुल॰ 2007 – 9 सित॰ 2009 उतरती (चंद्र से 2रा) 9 सित॰ 2009 – 15 नव॰ 2011 उतरती (चंद्र से 2रा) 16 मई 2012 – 4 अग॰ 2012 |
| 13 जुल॰ 2034 – 26 सित॰ 2041 चढ़ती (चंद्र से 12वाँ) 13 जुल॰ 2034 – 27 अग॰ 2036 शिखर (चंद्र पर) 27 अग॰ 2036 – 22 अक्टू॰ 2038 उतरती (चंद्र से 2रा) 22 अक्टू॰ 2038 – 5 अप्रैल 2039 शिखर (चंद्र पर) 5 अप्रैल 2039 – 13 जुल॰ 2039 उतरती (चंद्र से 2रा) 13 जुल॰ 2039 – 26 सित॰ 2041 |
| 24 अग॰ 2063 – 1 जन॰ 2066 चढ़ती (चंद्र से 12वाँ) 24 अग॰ 2063 – 5 फ़र॰ 2064 चढ़ती (चंद्र से 12वाँ) 9 मई 2064 – 13 अक्टू॰ 2065 शिखर (चंद्र पर) 13 अक्टू॰ 2065 – 1 जन॰ 2066 |
अभी अष्टम शनि (चंद्र से 8वाँ) चल रहा है, 23 फ़रवरी 2028 तक।
शनि ढैया (कंटक और अष्टम शनि)
| अवधि | प्रकार |
|---|---|
| 2 नव॰ 2014 – 26 अक्टू॰ 2017 | कंटक शनि (चंद्र से 4था) |
| 29 मार्च 2025 – 23 फ़र॰ 2028 | अष्टम शनि (चंद्र से 8वाँ) |
| 12 दिस॰ 2043 – 8 दिस॰ 2046 | कंटक शनि (चंद्र से 4था) |
साढ़े साती क्या है?
साढ़े साती लगभग साढ़े सात वर्ष का वह समय है जब शनि आपकी चंद्र राशि से पहले वाली राशि, चंद्र राशि और उसके बाद वाली राशि से गुज़रता है — हर एक में लगभग ढाई वर्ष। यह लगभग हर 30 वर्ष में आती है।
यह केवल दुर्भाग्य नहीं, बल्कि परिश्रम, ज़िम्मेदारी और धीमे परिणाम का समय है; बहुत से लोग इसमें बड़ी उपलब्धियाँ पाते हैं। इसका अनुभव आपकी कुंडली में शनि की शक्ति और चल रही दशा पर निर्भर करता है। शनि ढैया चंद्र से चौथी या आठवीं राशि पर शनि का ढाई वर्ष का छोटा गोचर है।
अपनी कुंडली में साढ़े साती, दशा और शनि की शक्ति देखें।
मेरी कुंडली बनाएँअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या सिंह पर अभी साढ़े साती है?
सिंह पर अभी साढ़े साती नहीं है। अगली 13 जुलाई 2034 से शुरू होगी।
सिंह की अगली साढ़े साती कब है?
सिंह की अगली साढ़े साती 13 जुलाई 2034 से 26 सितंबर 2041 तक है।
साढ़े साती के उपाय क्या हैं?
पारंपरिक उपाय हैं हनुमान और शिव की पूजा, शनिवार को शनि मंत्र या हनुमान चालीसा का पाठ, पीपल के नीचे तिल के तेल का दीपक, बुज़ुर्गों और श्रमिकों की सेवा, और शनिवार को काले तिल, सरसों का तेल या लोहे का दान।