रत्न
पुखराज रत्न
गुरु का रत्न, जो आपकी कुंडली में शुभ ग्रह होने पर उसे बल देने के लिए पहना जाता है।
| ग्रह | गुरु |
|---|---|
| उपरत्न | सुनहला (पीला टोपाज़) और सिट्रीन |
| धातु | सोना |
| उंगली | तर्जनी |
| पहनने का दिन | गुरुवार |
| मंत्र | ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः |
| वज़न | परंपरागत नियम: हर 10–12 किलो शरीर के वज़न पर लगभग 1 रत्ती। केवल लैब प्रमाणपत्र के साथ खरीदें। |
| इसके साथ न पहनें | पन्ना और हीरा |
पुखराज के लाभ
पुखराज गुरु को बल देता है, जो ज्ञान, संतान, धन और सौभाग्य का कारक है। यह तब सहायक है जब आपकी कुंडली में गुरु शुभ भावों (लग्न, 5वाँ या 9वाँ) का स्वामी हो और कमज़ोर हो; यदि गुरु 6, 8 या 12वें भाव का स्वामी हो तो उसे बल देना हानि कर सकता है।
अभिमंत्रित करें
पहली सुबह कच्चे दूध और गंगाजल से धोएँ, दीपक जलाएँ, ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः का 108 बार जप करें, फिर धारण करें।
लग्न अनुसार पुखराज कौन पहने
| मेष | पहले ज्योतिषी से पूछें |
| वृषभ | न पहनें |
| मिथुन | पहले ज्योतिषी से पूछें |
| कर्क | पहले ज्योतिषी से पूछें |
| सिंह | पहले ज्योतिषी से पूछें |
| कन्या | पहले ज्योतिषी से पूछें |
| तुला | न पहनें |
| वृश्चिक | आपके अनुकूल |
| धनु | आपके अनुकूल |
| मकर | न पहनें |
| कुम्भ | न पहनें |
| मीन | आपके अनुकूल |
रत्न तभी काम करते हैं जब वे प्राकृतिक हों और कुंडली के अनुकूल हों। दुकान के लिंक केवल प्रमाणित रत्न खोजने में मदद के लिए खोज पेज हैं; हम रत्न नहीं बेचते।
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