भावों में ग्रह · केंद्र
पहले भाव में राहु
North node · तनु भाव
राहु महत्वाकांक्षा, विदेश, तकनीक और इच्छा का कारक है। पहले भाव, जिसे तनु भाव कहते हैं, स्वयं, शरीर और व्यक्तित्व को दर्शाता है। जब राहु यहाँ होता है, तो इन विषयों पर उसका रंग चढ़ता है।
लग्न में पाप ग्रह इच्छाशक्ति और ऊर्जा देता है, पर अधीर या कठोर बना सकता है और स्वास्थ्य पर ध्यान माँगता है।
पहले भाव केंद्र है, कुंडली का स्तंभ, इसलिए यहाँ का ग्रह अपने फल खुलकर और प्रबलता से देता है।
राहु छाया ग्रह है और राशि स्वामी व साथ बैठे ग्रहों के फल देता है; वृषभ में इसे बलवान माना जाता है।
यदि राहु वृश्चिक में नीच, अस्त या पाप ग्रहों से पीड़ित हो तो फल कमज़ोर होते हैं।
गोचर में
जब राहु आपकी चंद्र राशि से पहले भाव में गोचर करता है, तो पारंपरिक रूप से उस समय अधिक सावधानी चाहिए।
कोई भी एक स्थिति अकेले नहीं पढ़ी जाती: राशि, दृष्टि, युति, दशा और पूरी कुंडली परिणाम बदलते हैं।