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भावों में ग्रह · केंद्र

पहले भाव में गुरु

Jupiter · तनु भाव

गुरु ज्ञान, संतान, धन और सौभाग्य का कारक है। पहले भाव, जिसे तनु भाव कहते हैं, स्वयं, शरीर और व्यक्तित्व को दर्शाता है। जब गुरु यहाँ होता है, तो इन विषयों पर उसका रंग चढ़ता है।

लग्न में शुभ ग्रह वरदान है: सुखद स्वभाव, अच्छा स्वास्थ्य और आकर्षक व्यक्तित्व देता है, और पूरी कुंडली की रक्षा करता है।

पहले भाव केंद्र है, कुंडली का स्तंभ, इसलिए यहाँ का ग्रह अपने फल खुलकर और प्रबलता से देता है।

पहले भाव में गुरु को दिग्बल मिलता है, जो यहाँ उसे स्पष्ट रूप से बलवान बनाता है।

गुरु यहाँ सबसे अच्छे फल तब देता है जब वह कर्क में उच्च, अपनी राशि (धनु और मीन) में या मित्र राशि में हो, और अस्त न हो।

यदि गुरु मकर में नीच, अस्त या पाप ग्रहों से पीड़ित हो तो फल कमज़ोर होते हैं।

गोचर में

जब गुरु आपकी चंद्र राशि से पहले भाव में गोचर करता है, तो पारंपरिक रूप से उस समय अधिक सावधानी चाहिए।

कोई भी एक स्थिति अकेले नहीं पढ़ी जाती: राशि, दृष्टि, युति, दशा और पूरी कुंडली परिणाम बदलते हैं।

अपनी कुंडली में गुरु किस भाव में है, उसके बल और स्थिति के साथ देखें।
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अन्य भावों में गुरु

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