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भावों में ग्रह · मारक

दूसरे भाव में गुरु

Jupiter · धन भाव

गुरु ज्ञान, संतान, धन और सौभाग्य का कारक है। दूसरे भाव, जिसे धन भाव कहते हैं, धन, परिवार और वाणी को दर्शाता है। जब गुरु यहाँ होता है, तो इन विषयों पर उसका रंग चढ़ता है।

दूसरे भाव में शुभ ग्रह बचत, मधुर और सत्य वाणी तथा परिवार में सामंजस्य देता है।

दूसरे भाव मारक भाव भी है और संसाधनों का भी, इसलिए फल ग्रह की स्थिति-बल पर बहुत निर्भर करते हैं।

गुरु यहाँ सबसे अच्छे फल तब देता है जब वह कर्क में उच्च, अपनी राशि (धनु और मीन) में या मित्र राशि में हो, और अस्त न हो।

यदि गुरु मकर में नीच, अस्त या पाप ग्रहों से पीड़ित हो तो फल कमज़ोर होते हैं।

गोचर में

जब गुरु आपकी चंद्र राशि से दूसरे भाव में गोचर करता है, तो पारंपरिक रूप से वह समय शुभ होता है।

कोई भी एक स्थिति अकेले नहीं पढ़ी जाती: राशि, दृष्टि, युति, दशा और पूरी कुंडली परिणाम बदलते हैं।

अपनी कुंडली में गुरु किस भाव में है, उसके बल और स्थिति के साथ देखें।
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अन्य भावों में गुरु

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दूसरे भाव में अन्य ग्रह

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