भावों में ग्रह · मारक
दूसरे भाव में शुक्र
Venus · धन भाव
शुक्र प्रेम, विवाह, कला और सुख-सुविधा का कारक है। दूसरे भाव, जिसे धन भाव कहते हैं, धन, परिवार और वाणी को दर्शाता है। जब शुक्र यहाँ होता है, तो इन विषयों पर उसका रंग चढ़ता है।
दूसरे भाव में शुभ ग्रह बचत, मधुर और सत्य वाणी तथा परिवार में सामंजस्य देता है।
दूसरे भाव मारक भाव भी है और संसाधनों का भी, इसलिए फल ग्रह की स्थिति-बल पर बहुत निर्भर करते हैं।
शुक्र यहाँ सबसे अच्छे फल तब देता है जब वह मीन में उच्च, अपनी राशि (वृषभ और तुला) में या मित्र राशि में हो, और अस्त न हो।
यदि शुक्र कन्या में नीच, अस्त या पाप ग्रहों से पीड़ित हो तो फल कमज़ोर होते हैं।
गोचर में
जब शुक्र आपकी चंद्र राशि से दूसरे भाव में गोचर करता है, तो पारंपरिक रूप से वह समय शुभ होता है।
कोई भी एक स्थिति अकेले नहीं पढ़ी जाती: राशि, दृष्टि, युति, दशा और पूरी कुंडली परिणाम बदलते हैं।