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भावों में ग्रह · उपचय

तीसरे भाव में शुक्र

Venus · सहज भाव

शुक्र प्रेम, विवाह, कला और सुख-सुविधा का कारक है। तीसरे भाव, जिसे सहज भाव कहते हैं, साहस, भाई-बहन और पराक्रम को दर्शाता है। जब शुक्र यहाँ होता है, तो इन विषयों पर उसका रंग चढ़ता है।

तीसरे भाव में शुभ ग्रह प्रयास को कोमल बनाता है; संवाद, लेखन और भाई-बहनों से अच्छे संबंध देता है, पर उत्साह कुछ कम रह सकता है।

तीसरे भाव उपचय (वृद्धि का भाव) है: समय और प्रयास के साथ फल लगातार सुधरते हैं।

शुक्र यहाँ सबसे अच्छे फल तब देता है जब वह मीन में उच्च, अपनी राशि (वृषभ और तुला) में या मित्र राशि में हो, और अस्त न हो।

यदि शुक्र कन्या में नीच, अस्त या पाप ग्रहों से पीड़ित हो तो फल कमज़ोर होते हैं।

गोचर में

जब शुक्र आपकी चंद्र राशि से तीसरे भाव में गोचर करता है, तो पारंपरिक रूप से वह समय शुभ होता है।

कोई भी एक स्थिति अकेले नहीं पढ़ी जाती: राशि, दृष्टि, युति, दशा और पूरी कुंडली परिणाम बदलते हैं।

अपनी कुंडली में शुक्र किस भाव में है, उसके बल और स्थिति के साथ देखें।
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अन्य भावों में शुक्र

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