भावों में ग्रह · उपचय
तीसरे भाव में गुरु
Jupiter · सहज भाव
गुरु ज्ञान, संतान, धन और सौभाग्य का कारक है। तीसरे भाव, जिसे सहज भाव कहते हैं, साहस, भाई-बहन और पराक्रम को दर्शाता है। जब गुरु यहाँ होता है, तो इन विषयों पर उसका रंग चढ़ता है।
तीसरे भाव में शुभ ग्रह प्रयास को कोमल बनाता है; संवाद, लेखन और भाई-बहनों से अच्छे संबंध देता है, पर उत्साह कुछ कम रह सकता है।
तीसरे भाव उपचय (वृद्धि का भाव) है: समय और प्रयास के साथ फल लगातार सुधरते हैं।
गुरु यहाँ सबसे अच्छे फल तब देता है जब वह कर्क में उच्च, अपनी राशि (धनु और मीन) में या मित्र राशि में हो, और अस्त न हो।
यदि गुरु मकर में नीच, अस्त या पाप ग्रहों से पीड़ित हो तो फल कमज़ोर होते हैं।
गोचर में
जब गुरु आपकी चंद्र राशि से तीसरे भाव में गोचर करता है, तो पारंपरिक रूप से उस समय अधिक सावधानी चाहिए।
कोई भी एक स्थिति अकेले नहीं पढ़ी जाती: राशि, दृष्टि, युति, दशा और पूरी कुंडली परिणाम बदलते हैं।