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भावों में ग्रह · दुःस्थान

आठवें भाव में गुरु

Jupiter · आयु भाव

गुरु ज्ञान, संतान, धन और सौभाग्य का कारक है। आठवें भाव, जिसे आयु भाव कहते हैं, आयु, रहस्य और अचानक घटनाएँ को दर्शाता है। जब गुरु यहाँ होता है, तो इन विषयों पर उसका रंग चढ़ता है।

आठवें भाव में शुभ ग्रह आयु की रक्षा करता है और शोध व गूढ़ विषयों में रुचि देता है, पर बाहरी फल कम होते हैं।

आठवें भाव दुःस्थान (कठिनाई का भाव) है, इसलिए यहाँ फल चुनौतियों से होकर आते हैं और सजगता चाहिए।

गुरु यहाँ सबसे अच्छे फल तब देता है जब वह कर्क में उच्च, अपनी राशि (धनु और मीन) में या मित्र राशि में हो, और अस्त न हो।

यदि गुरु मकर में नीच, अस्त या पाप ग्रहों से पीड़ित हो तो फल कमज़ोर होते हैं।

गोचर में

जब गुरु आपकी चंद्र राशि से आठवें भाव में गोचर करता है, तो पारंपरिक रूप से उस समय अधिक सावधानी चाहिए।

कोई भी एक स्थिति अकेले नहीं पढ़ी जाती: राशि, दृष्टि, युति, दशा और पूरी कुंडली परिणाम बदलते हैं।

अपनी कुंडली में गुरु किस भाव में है, उसके बल और स्थिति के साथ देखें।
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