ग्रहवाणीग्रहों की वाणी
नई कुंडली

भावों में ग्रह · उपचय

ग्यारहवें भाव में गुरु

Jupiter · लाभ भाव

गुरु ज्ञान, संतान, धन और सौभाग्य का कारक है। ग्यारहवें भाव, जिसे लाभ भाव कहते हैं, लाभ, आय और मित्र को दर्शाता है। जब गुरु यहाँ होता है, तो इन विषयों पर उसका रंग चढ़ता है।

ग्यारहवें भाव में हर ग्रह लाभ देता है; यहाँ शुभ ग्रह स्थिर आय और सहायक मित्र देता है।

ग्यारहवें भाव उपचय (वृद्धि का भाव) है: समय और प्रयास के साथ फल लगातार सुधरते हैं।

गुरु यहाँ सबसे अच्छे फल तब देता है जब वह कर्क में उच्च, अपनी राशि (धनु और मीन) में या मित्र राशि में हो, और अस्त न हो।

यदि गुरु मकर में नीच, अस्त या पाप ग्रहों से पीड़ित हो तो फल कमज़ोर होते हैं।

गोचर में

जब गुरु आपकी चंद्र राशि से ग्यारहवें भाव में गोचर करता है, तो पारंपरिक रूप से वह समय शुभ होता है।

कोई भी एक स्थिति अकेले नहीं पढ़ी जाती: राशि, दृष्टि, युति, दशा और पूरी कुंडली परिणाम बदलते हैं।

अपनी कुंडली में गुरु किस भाव में है, उसके बल और स्थिति के साथ देखें।
मुफ्त कुंडली बनाएं

अन्य भावों में गुरु

पहलेदूसरेतीसरेचौथेपाँचवेंछठेसातवेंआठवेंनौवेंदसवेंग्यारहवेंबारहवें

ग्यारहवें भाव में अन्य ग्रह

सूर्यचंद्रमंगलबुधशुक्रशनिराहुकेतु