भावों में ग्रह · उपचय
ग्यारहवें भाव में केतु
South node · लाभ भाव
केतु वैराग्य, अंतर्ज्ञान, अध्यात्म और पूर्व कर्म का कारक है। ग्यारहवें भाव, जिसे लाभ भाव कहते हैं, लाभ, आय और मित्र को दर्शाता है। जब केतु यहाँ होता है, तो इन विषयों पर उसका रंग चढ़ता है।
ग्यारहवें भाव में पाप ग्रह बलवान है: लाभ, इच्छापूर्ति और प्रभावशाली संपर्क देता है।
ग्यारहवें भाव उपचय (वृद्धि का भाव) है: समय और प्रयास के साथ फल लगातार सुधरते हैं।
केतु छाया ग्रह है और राशि स्वामी व साथ बैठे ग्रहों के फल देता है; वृश्चिक में इसे बलवान माना जाता है।
यदि केतु वृषभ में नीच, अस्त या पाप ग्रहों से पीड़ित हो तो फल कमज़ोर होते हैं।
गोचर में
जब केतु आपकी चंद्र राशि से ग्यारहवें भाव में गोचर करता है, तो पारंपरिक रूप से वह समय शुभ होता है।
कोई भी एक स्थिति अकेले नहीं पढ़ी जाती: राशि, दृष्टि, युति, दशा और पूरी कुंडली परिणाम बदलते हैं।