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भावों में ग्रह · दुःस्थान

बारहवें भाव में केतु

South node · व्यय भाव

केतु वैराग्य, अंतर्ज्ञान, अध्यात्म और पूर्व कर्म का कारक है। बारहवें भाव, जिसे व्यय भाव कहते हैं, व्यय, विदेश और मोक्ष को दर्शाता है। जब केतु यहाँ होता है, तो इन विषयों पर उसका रंग चढ़ता है।

बारहवें भाव में पाप ग्रह खर्च, हानि या नींद की समस्या बढ़ा सकता है, पर वैराग्य और विदेश में कार्य में सहायक है।

बारहवें भाव दुःस्थान (कठिनाई का भाव) है, इसलिए यहाँ फल चुनौतियों से होकर आते हैं और सजगता चाहिए।

केतु छाया ग्रह है और राशि स्वामी व साथ बैठे ग्रहों के फल देता है; वृश्चिक में इसे बलवान माना जाता है।

यदि केतु वृषभ में नीच, अस्त या पाप ग्रहों से पीड़ित हो तो फल कमज़ोर होते हैं।

गोचर में

जब केतु आपकी चंद्र राशि से बारहवें भाव में गोचर करता है, तो पारंपरिक रूप से उस समय अधिक सावधानी चाहिए।

कोई भी एक स्थिति अकेले नहीं पढ़ी जाती: राशि, दृष्टि, युति, दशा और पूरी कुंडली परिणाम बदलते हैं।

अपनी कुंडली में केतु किस भाव में है, उसके बल और स्थिति के साथ देखें।
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