भावों में ग्रह · त्रिकोण
पाँचवें भाव में केतु
South node · पुत्र भाव
केतु वैराग्य, अंतर्ज्ञान, अध्यात्म और पूर्व कर्म का कारक है। पाँचवें भाव, जिसे पुत्र भाव कहते हैं, संतान, बुद्धि और रचनात्मकता को दर्शाता है। जब केतु यहाँ होता है, तो इन विषयों पर उसका रंग चढ़ता है।
पाँचवें भाव में पाप ग्रह संतान में देरी या मन में अस्थिरता ला सकता है, पर तेज़, व्यावहारिक बुद्धि देता है।
पाँचवें भाव त्रिकोण है, भाग्य के भावों में से एक, जो यहाँ बैठे किसी भी ग्रह को बेहतर बनाता है।
केतु छाया ग्रह है और राशि स्वामी व साथ बैठे ग्रहों के फल देता है; वृश्चिक में इसे बलवान माना जाता है।
यदि केतु वृषभ में नीच, अस्त या पाप ग्रहों से पीड़ित हो तो फल कमज़ोर होते हैं।
गोचर में
जब केतु आपकी चंद्र राशि से पाँचवें भाव में गोचर करता है, तो पारंपरिक रूप से उस समय अधिक सावधानी चाहिए।
कोई भी एक स्थिति अकेले नहीं पढ़ी जाती: राशि, दृष्टि, युति, दशा और पूरी कुंडली परिणाम बदलते हैं।