भावों में ग्रह · मारक
दूसरे भाव में केतु
South node · धन भाव
केतु वैराग्य, अंतर्ज्ञान, अध्यात्म और पूर्व कर्म का कारक है। दूसरे भाव, जिसे धन भाव कहते हैं, धन, परिवार और वाणी को दर्शाता है। जब केतु यहाँ होता है, तो इन विषयों पर उसका रंग चढ़ता है।
दूसरे भाव में पाप ग्रह वाणी को तीखा और धन को अस्थिर बना सकता है, परिवार में सावधानी चाहिए।
दूसरे भाव मारक भाव भी है और संसाधनों का भी, इसलिए फल ग्रह की स्थिति-बल पर बहुत निर्भर करते हैं।
केतु छाया ग्रह है और राशि स्वामी व साथ बैठे ग्रहों के फल देता है; वृश्चिक में इसे बलवान माना जाता है।
यदि केतु वृषभ में नीच, अस्त या पाप ग्रहों से पीड़ित हो तो फल कमज़ोर होते हैं।
गोचर में
जब केतु आपकी चंद्र राशि से दूसरे भाव में गोचर करता है, तो पारंपरिक रूप से उस समय अधिक सावधानी चाहिए।
कोई भी एक स्थिति अकेले नहीं पढ़ी जाती: राशि, दृष्टि, युति, दशा और पूरी कुंडली परिणाम बदलते हैं।