भावों में ग्रह · दुःस्थान
बारहवें भाव में गुरु
Jupiter · व्यय भाव
गुरु ज्ञान, संतान, धन और सौभाग्य का कारक है। बारहवें भाव, जिसे व्यय भाव कहते हैं, व्यय, विदेश और मोक्ष को दर्शाता है। जब गुरु यहाँ होता है, तो इन विषयों पर उसका रंग चढ़ता है।
बारहवें भाव में शुभ ग्रह खर्च को अच्छे कार्यों की ओर मोड़ता है और नींद, आध्यात्मिक जीवन व विदेश संबंधों में सहायक है।
बारहवें भाव दुःस्थान (कठिनाई का भाव) है, इसलिए यहाँ फल चुनौतियों से होकर आते हैं और सजगता चाहिए।
गुरु यहाँ सबसे अच्छे फल तब देता है जब वह कर्क में उच्च, अपनी राशि (धनु और मीन) में या मित्र राशि में हो, और अस्त न हो।
यदि गुरु मकर में नीच, अस्त या पाप ग्रहों से पीड़ित हो तो फल कमज़ोर होते हैं।
गोचर में
जब गुरु आपकी चंद्र राशि से बारहवें भाव में गोचर करता है, तो पारंपरिक रूप से उस समय अधिक सावधानी चाहिए।
कोई भी एक स्थिति अकेले नहीं पढ़ी जाती: राशि, दृष्टि, युति, दशा और पूरी कुंडली परिणाम बदलते हैं।