भावों में ग्रह · उपचय
ग्यारहवें भाव में सूर्य
Sun · लाभ भाव
सूर्य आत्मा, पिता, अधिकार और जीवनशक्ति का कारक है। ग्यारहवें भाव, जिसे लाभ भाव कहते हैं, लाभ, आय और मित्र को दर्शाता है। जब सूर्य यहाँ होता है, तो इन विषयों पर उसका रंग चढ़ता है।
ग्यारहवें भाव में पाप ग्रह बलवान है: लाभ, इच्छापूर्ति और प्रभावशाली संपर्क देता है।
ग्यारहवें भाव उपचय (वृद्धि का भाव) है: समय और प्रयास के साथ फल लगातार सुधरते हैं।
सूर्य यहाँ सबसे अच्छे फल तब देता है जब वह मेष में उच्च, अपनी राशि (सिंह) में या मित्र राशि में हो, और अस्त न हो।
यदि सूर्य तुला में नीच हो या शनि या राहु से पीड़ित हो तो फल कमज़ोर होते हैं।
गोचर में
जब सूर्य आपकी चंद्र राशि से ग्यारहवें भाव में गोचर करता है, तो पारंपरिक रूप से वह समय शुभ होता है।
कोई भी एक स्थिति अकेले नहीं पढ़ी जाती: राशि, दृष्टि, युति, दशा और पूरी कुंडली परिणाम बदलते हैं।