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भावों में ग्रह · उपचय

तीसरे भाव में सूर्य

Sun · सहज भाव

सूर्य आत्मा, पिता, अधिकार और जीवनशक्ति का कारक है। तीसरे भाव, जिसे सहज भाव कहते हैं, साहस, भाई-बहन और पराक्रम को दर्शाता है। जब सूर्य यहाँ होता है, तो इन विषयों पर उसका रंग चढ़ता है।

तीसरे भाव में पाप ग्रह सबसे अच्छा है: साहस, पहल और प्रयास से जीतने की इच्छा देता है।

तीसरे भाव उपचय (वृद्धि का भाव) है: समय और प्रयास के साथ फल लगातार सुधरते हैं।

सूर्य यहाँ सबसे अच्छे फल तब देता है जब वह मेष में उच्च, अपनी राशि (सिंह) में या मित्र राशि में हो, और अस्त न हो।

यदि सूर्य तुला में नीच हो या शनि या राहु से पीड़ित हो तो फल कमज़ोर होते हैं।

गोचर में

जब सूर्य आपकी चंद्र राशि से तीसरे भाव में गोचर करता है, तो पारंपरिक रूप से वह समय शुभ होता है।

कोई भी एक स्थिति अकेले नहीं पढ़ी जाती: राशि, दृष्टि, युति, दशा और पूरी कुंडली परिणाम बदलते हैं।

अपनी कुंडली में सूर्य किस भाव में है, उसके बल और स्थिति के साथ देखें।
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अन्य भावों में सूर्य

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