भावों में ग्रह · उपचय
तीसरे भाव में राहु
North node · सहज भाव
राहु महत्वाकांक्षा, विदेश, तकनीक और इच्छा का कारक है। तीसरे भाव, जिसे सहज भाव कहते हैं, साहस, भाई-बहन और पराक्रम को दर्शाता है। जब राहु यहाँ होता है, तो इन विषयों पर उसका रंग चढ़ता है।
तीसरे भाव में पाप ग्रह सबसे अच्छा है: साहस, पहल और प्रयास से जीतने की इच्छा देता है।
तीसरे भाव उपचय (वृद्धि का भाव) है: समय और प्रयास के साथ फल लगातार सुधरते हैं।
राहु छाया ग्रह है और राशि स्वामी व साथ बैठे ग्रहों के फल देता है; वृषभ में इसे बलवान माना जाता है।
यदि राहु वृश्चिक में नीच, अस्त या पाप ग्रहों से पीड़ित हो तो फल कमज़ोर होते हैं।
गोचर में
जब राहु आपकी चंद्र राशि से तीसरे भाव में गोचर करता है, तो पारंपरिक रूप से वह समय शुभ होता है।
कोई भी एक स्थिति अकेले नहीं पढ़ी जाती: राशि, दृष्टि, युति, दशा और पूरी कुंडली परिणाम बदलते हैं।