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दसवें भाव में सूर्य

Sun · कर्म भाव

सूर्य आत्मा, पिता, अधिकार और जीवनशक्ति का कारक है। दसवें भाव, जिसे कर्म भाव कहते हैं, करियर, पद और कर्म को दर्शाता है। जब सूर्य यहाँ होता है, तो इन विषयों पर उसका रंग चढ़ता है।

दसवें भाव में पाप ग्रह महत्वाकांक्षा, अधिकार और कठिन परिश्रम से मिली सफलता देता है।

दसवें भाव केंद्र है, कुंडली का स्तंभ, इसलिए यहाँ का ग्रह अपने फल खुलकर और प्रबलता से देता है।

दसवें भाव में सूर्य को दिग्बल मिलता है, जो यहाँ उसे स्पष्ट रूप से बलवान बनाता है।

सूर्य यहाँ सबसे अच्छे फल तब देता है जब वह मेष में उच्च, अपनी राशि (सिंह) में या मित्र राशि में हो, और अस्त न हो।

यदि सूर्य तुला में नीच हो या शनि या राहु से पीड़ित हो तो फल कमज़ोर होते हैं।

गोचर में

जब सूर्य आपकी चंद्र राशि से दसवें भाव में गोचर करता है, तो पारंपरिक रूप से वह समय शुभ होता है।

कोई भी एक स्थिति अकेले नहीं पढ़ी जाती: राशि, दृष्टि, युति, दशा और पूरी कुंडली परिणाम बदलते हैं।

अपनी कुंडली में सूर्य किस भाव में है, उसके बल और स्थिति के साथ देखें।
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