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भावों में ग्रह · उपचय

ग्यारहवें भाव में शुक्र

Venus · लाभ भाव

शुक्र प्रेम, विवाह, कला और सुख-सुविधा का कारक है। ग्यारहवें भाव, जिसे लाभ भाव कहते हैं, लाभ, आय और मित्र को दर्शाता है। जब शुक्र यहाँ होता है, तो इन विषयों पर उसका रंग चढ़ता है।

ग्यारहवें भाव में हर ग्रह लाभ देता है; यहाँ शुभ ग्रह स्थिर आय और सहायक मित्र देता है।

ग्यारहवें भाव उपचय (वृद्धि का भाव) है: समय और प्रयास के साथ फल लगातार सुधरते हैं।

शुक्र यहाँ सबसे अच्छे फल तब देता है जब वह मीन में उच्च, अपनी राशि (वृषभ और तुला) में या मित्र राशि में हो, और अस्त न हो।

यदि शुक्र कन्या में नीच, अस्त या पाप ग्रहों से पीड़ित हो तो फल कमज़ोर होते हैं।

गोचर में

जब शुक्र आपकी चंद्र राशि से ग्यारहवें भाव में गोचर करता है, तो पारंपरिक रूप से वह समय शुभ होता है।

कोई भी एक स्थिति अकेले नहीं पढ़ी जाती: राशि, दृष्टि, युति, दशा और पूरी कुंडली परिणाम बदलते हैं।

अपनी कुंडली में शुक्र किस भाव में है, उसके बल और स्थिति के साथ देखें।
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