पूजा विधि
गणेश चतुर्थी पूजा विधि 2027: सामग्री, विधि और मुहूर्त
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी पर गणेश जन्मोत्सव; मध्याह्न में मूर्ति स्थापना।
2027 की तिथि और पूजा मुहूर्त
शनिवार, 4 सितंबर 2027
- मध्याह्न पूजा
- 11:04 – 13:36
समय नई दिल्ली के लिए है। अन्य शहरों की तिथि और मुहूर्त नीचे हैं।
सामग्री
- गणेश मूर्ति
- लाल कपड़ा
- दूर्वा (21)
- मोदक
- लाल फूल
- कुमकुम
- हल्दी
- चावल
- नारियल
- पान के पत्ते
- धूप और दीया।
घर पर गणेश चतुर्थी पूजा कैसे करें
- साफ़ आसन पर पूर्व या उत्तर मुख करके मूर्ति स्थापित करें।
- मंत्रों से गणेश का आवाहन और प्राण प्रतिष्ठा करें।
- दूर्वा, लाल फूल, कुमकुम और 21 मोदक चढ़ाएँ।
- ॐ गं गणपतये नमः का जप करें और गणेश कथा पढ़ें।
- विसर्जन तक सुबह-शाम आरती करें।
गणेश चतुर्थी कथा
माता पार्वती ने चंदन के लेप से एक बालक बनाया और उसे द्वार की रक्षा करने को कहा।
शिव ने उसे न पहचानकर उसका सिर काट दिया; पार्वती को सांत्वना देने के लिए उसे हाथी का सिर दिया।
शिव ने आशीर्वाद दिया कि हर अनुष्ठान में सबसे पहले विघ्नहर्ता गणेश की पूजा होगी।
सरल घरेलू पूजा। जहाँ अलग हो, अपनी पारिवारिक परंपरा और पुरोहित का पालन करें।
प्रमुख शहरों में गणेश चतुर्थी 2027 पूजा मुहूर्त
| शहर | मुहूर्त |
|---|---|
| दिल्ली | 11:04 – 13:36 |
| मुंबई | 11:25 – 13:56 |
| अहमदाबाद | 11:25 – 13:58 |
| कोलकाता | 10:20 – 12:50 |
| चेन्नै | 10:54 – 13:22 |
| बेंगलुरु | 11:04 – 13:32 |
| हैदराबाद | 11:00 – 13:29 |
| पुणे | 11:21 – 13:52 |
| जयपुर | 11:10 – 13:41 |
| लखनऊ | 10:49 – 13:20 |
अपने शहर का गणेश चतुर्थी मुहूर्त पाएँ, कथा सुनने के बटन के साथ।
पूजा विधि खोलेंअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2027 में गणेश चतुर्थी पूजा का मुहूर्त क्या है?
गणेश चतुर्थी शनिवार, 4 सितंबर 2027 को है। नई दिल्ली में पूजा का श्रेष्ठ समय 11:04 – 13:36 है। अपने शहर के लिए पूजा गाइड खोलें।
गणेश चतुर्थी पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?
गणेश मूर्ति, लाल कपड़ा, दूर्वा (21), मोदक, लाल फूल, कुमकुम, हल्दी, चावल, नारियल, पान के पत्ते, धूप और दीया।
घर पर गणेश चतुर्थी पूजा कैसे करें?
साफ़ आसन पर पूर्व या उत्तर मुख करके मूर्ति स्थापित करें। मंत्रों से गणेश का आवाहन और प्राण प्रतिष्ठा करें। दूर्वा, लाल फूल, कुमकुम और 21 मोदक चढ़ाएँ। ॐ गं गणपतये नमः का जप करें और गणेश कथा पढ़ें। विसर्जन तक सुबह-शाम आरती करें।