पूजा विधि
शारदीय नवरात्रि आरंभ पूजा विधि 2027: सामग्री, विधि और मुहूर्त
देवी की नौ रातें, आश्विन शुक्ल प्रतिपदा की सुबह घटस्थापना से आरंभ।
2027 की तिथि और पूजा मुहूर्त
गुरुवार, 30 सितंबर 2027
- प्रातः पूजा
- 06:13 – 08:37
समय नई दिल्ली के लिए है। अन्य शहरों की तिथि और मुहूर्त नीचे हैं।
सामग्री
- कलश
- जौ और मिट्टी
- लाल कपड़े में नारियल
- आम के पत्ते
- लाल चुनरी
- दुर्गा चित्र
- अखंड दीया
- कुमकुम
- फूल और फल।
घर पर शारदीय नवरात्रि आरंभ पूजा कैसे करें
- मिट्टी में जौ बोएँ और आम के पत्ते व नारियल के साथ कलश स्थापित करें (घटस्थापना)।
- नौ दिन जलने वाला अखंड दीया जलाएँ।
- हर दिन दुर्गा के एक रूप की फूल और कुमकुम से पूजा करें।
- दुर्गा सप्तशती पढ़ें या ॐ दुं दुर्गायै नमः का जप करें।
- अष्टमी या नवमी पर कन्याओं को भोजन कराकर सम्मान करें (कन्या पूजन)।
शारदीय नवरात्रि आरंभ कथा
देवता महिषासुर को पराजित नहीं कर पा रहे थे।
उनकी सम्मिलित शक्ति देवी दुर्गा के रूप में प्रकट हुई, जिन्होंने नौ दिन उससे युद्ध किया।
दसवें दिन उन्होंने उसका संहार किया — बुराई पर अच्छाई की विजय।
सरल घरेलू पूजा। जहाँ अलग हो, अपनी पारिवारिक परंपरा और पुरोहित का पालन करें।
प्रमुख शहरों में शारदीय नवरात्रि आरंभ 2027 पूजा मुहूर्त
| शहर | मुहूर्त |
|---|---|
| दिल्ली | 06:13 – 08:37 |
| मुंबई | 06:28 – 08:52 |
| अहमदाबाद | 06:30 – 08:54 |
| कोलकाता | 05:27 – 07:51 |
| चेन्नै | 05:58 – 08:22 |
| बेंगलुरु | 06:08 – 08:32 |
| हैदराबाद | 06:06 – 08:30 |
| पुणे | 06:24 – 08:48 |
| जयपुर | 06:18 – 08:42 |
| लखनऊ | 05:58 – 08:22 |
अपने शहर का शारदीय नवरात्रि आरंभ मुहूर्त पाएँ, कथा सुनने के बटन के साथ।
पूजा विधि खोलेंअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2027 में शारदीय नवरात्रि आरंभ पूजा का मुहूर्त क्या है?
शारदीय नवरात्रि आरंभ गुरुवार, 30 सितंबर 2027 को है। नई दिल्ली में पूजा का श्रेष्ठ समय 06:13 – 08:37 है। अपने शहर के लिए पूजा गाइड खोलें।
शारदीय नवरात्रि आरंभ पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?
कलश, जौ और मिट्टी, लाल कपड़े में नारियल, आम के पत्ते, लाल चुनरी, दुर्गा चित्र, अखंड दीया, कुमकुम, फूल और फल।
घर पर शारदीय नवरात्रि आरंभ पूजा कैसे करें?
मिट्टी में जौ बोएँ और आम के पत्ते व नारियल के साथ कलश स्थापित करें (घटस्थापना)। नौ दिन जलने वाला अखंड दीया जलाएँ। हर दिन दुर्गा के एक रूप की फूल और कुमकुम से पूजा करें। दुर्गा सप्तशती पढ़ें या ॐ दुं दुर्गायै नमः का जप करें। अष्टमी या नवमी पर कन्याओं को भोजन कराकर सम्मान करें (कन्या पूजन)।