पूजा विधि
कृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि 2027: सामग्री, विधि और मुहूर्त
भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण जन्म; भक्त आधी रात तक व्रत रखते हैं।
2027 की तिथि और पूजा मुहूर्त
बुधवार, 25 अगस्त 2027
- निशीथ (मध्यरात्रि) पूजा
- 23:59 – 00:47
समय नई दिल्ली के लिए है। अन्य शहरों की तिथि और मुहूर्त नीचे हैं।
सामग्री
- बाल गोपाल की मूर्ति
- पालना
- पंचामृत
- गंगाजल
- नए वस्त्र और बांसुरी
- तुलसी
- माखन-मिश्री
- फल
- फूल और दीया।
घर पर कृष्ण जन्माष्टमी पूजा कैसे करें
- दिन भर व्रत रखें और पालना सजाएँ।
- मध्यरात्रि में बाल गोपाल को पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराएँ।
- मूर्ति को वस्त्र पहनाकर पालने में रखें।
- माखन, मिश्री और तुलसी चढ़ाएँ; ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जप करें।
- पालना झुलाएँ, भजन गाएँ और प्रसाद से व्रत खोलें।
कृष्ण जन्माष्टमी कथा
राजा कंस ने अपनी बहन देवकी को कारागार में डाला, क्योंकि उसकी आठवीं संतान के हाथों कंस की मृत्यु की भविष्यवाणी थी।
आधी रात श्रीकृष्ण जन्मे; कारागार के द्वार खुल गए और वसुदेव उन्हें यमुना पार गोकुल ले गए।
वे यशोदा और नंद के यहाँ पले और बाद में मथुरा को कंस से मुक्त कराया।
सरल घरेलू पूजा। जहाँ अलग हो, अपनी पारिवारिक परंपरा और पुरोहित का पालन करें।
प्रमुख शहरों में कृष्ण जन्माष्टमी 2027 पूजा मुहूर्त
| शहर | मुहूर्त |
|---|---|
| दिल्ली | 23:59 – 00:47 |
| मुंबई | 00:16 – 01:04 |
| अहमदाबाद | 00:17 – 01:05 |
| कोलकाता | 23:14 – 00:02 |
| चेन्नै | 23:47 – 00:35 |
| बेंगलुरु | 23:57 – 00:45 |
| हैदराबाद | 23:54 – 00:42 |
| पुणे | 00:12 – 01:00 |
| जयपुर | 00:05 – 00:53 |
| लखनऊ | 23:44 – 00:32 |
अपने शहर का कृष्ण जन्माष्टमी मुहूर्त पाएँ, कथा सुनने के बटन के साथ।
पूजा विधि खोलेंअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2027 में कृष्ण जन्माष्टमी पूजा का मुहूर्त क्या है?
कृष्ण जन्माष्टमी बुधवार, 25 अगस्त 2027 को है। नई दिल्ली में पूजा का श्रेष्ठ समय 23:59 – 00:47 है। अपने शहर के लिए पूजा गाइड खोलें।
कृष्ण जन्माष्टमी पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?
बाल गोपाल की मूर्ति, पालना, पंचामृत, गंगाजल, नए वस्त्र और बांसुरी, तुलसी, माखन-मिश्री, फल, फूल और दीया।
घर पर कृष्ण जन्माष्टमी पूजा कैसे करें?
दिन भर व्रत रखें और पालना सजाएँ। मध्यरात्रि में बाल गोपाल को पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराएँ। मूर्ति को वस्त्र पहनाकर पालने में रखें। माखन, मिश्री और तुलसी चढ़ाएँ; ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जप करें। पालना झुलाएँ, भजन गाएँ और प्रसाद से व्रत खोलें।