वक्री ग्रह
गुरु वक्री 2026: तिथियाँ और अर्थ
गुरु 2026 में 2 बार वक्री होंगे। तिथियाँ भारतीय समय में हैं; राशि निरयण (लाहिड़ी) है।
| वक्री आरंभ | मार्गी | दिन | राशि |
|---|---|---|---|
| 11 नवंबर 2025 | 11 मार्च 2026 | 119 | कर्क → मिथुन |
| 13 दिसंबर 2026 | 13 अप्रैल 2027 | 121 | सिंह → कर्क |
गुरु वक्री का अर्थ
गुरु ज्ञान, संतान, शिक्षक, धन और धर्म के कारक हैं। वक्री गुरु बाहरी वृद्धि धीमी पर आंतरिक सीख गहरी करते हैं; पहले के वादे फिर परखे जाते हैं। अध्ययन, साधना और अधूरे आशीर्वाद पूरे करने का अच्छा समय।
क्या करें और क्या न करें
पढ़ाई, साधना और संतान या धन की पुरानी योजनाओं पर फिर से काम करें। गुरुजनों और बड़ों का सम्मान करें; गुरुवार को गुरु मंत्र जपें।
सूर्य, चंद्र, राहु और केतु सामान्य अर्थ में वक्री नहीं होते; राहु-केतु सदा उल्टी चाल चलते हैं।
अपनी जन्म कुंडली पर गोचर देखें, आने वाले महीनों की समयरेखा के साथ।
ग्रहण और वक्री ग्रहअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2026 में गुरु वक्री कब हैं?
11 नवंबर 2025 – 11 मार्च 2026 और 13 दिसंबर 2026 – 13 अप्रैल 2027
गुरु वक्री का क्या अर्थ है?
गुरु ज्ञान, संतान, शिक्षक, धन और धर्म के कारक हैं। वक्री गुरु बाहरी वृद्धि धीमी पर आंतरिक सीख गहरी करते हैं; पहले के वादे फिर परखे जाते हैं। अध्ययन, साधना और अधूरे आशीर्वाद पूरे करने का अच्छा समय।
गुरु वक्री में क्या करना चाहिए?
पढ़ाई, साधना और संतान या धन की पुरानी योजनाओं पर फिर से काम करें। गुरुजनों और बड़ों का सम्मान करें; गुरुवार को गुरु मंत्र जपें।