वक्री ग्रह
शुक्र वक्री 2026: तिथियाँ और अर्थ
शुक्र 2026 में 1 बार वक्री होंगे। तिथियाँ भारतीय समय में हैं; राशि निरयण (लाहिड़ी) है।
| वक्री आरंभ | मार्गी | दिन | राशि |
|---|---|---|---|
| 3 अक्टूबर 2026 | 14 नवंबर 2026 | 42 | तुला → कन्या |
शुक्र वक्री का अर्थ
शुक्र प्रेम, विवाह, सौंदर्य, कला और विलासिता के कारक हैं। वक्री शुक्र पुराने रिश्ते और भावनाएँ समीक्षा के लिए वापस लाते हैं, और धन व भोग के निर्णय कम भरोसेमंद रहते हैं। परंपरा से शुक्र वक्री में विवाह मुहूर्त टाले जाते हैं।
क्या करें और क्या न करें
विवाह की शुरुआत या विलासिता की खरीद टालें; रिश्तों और खर्च की शांति से समीक्षा करें। शुक्रवार को लक्ष्मी पूजा करें और सादगी रखें।
सूर्य, चंद्र, राहु और केतु सामान्य अर्थ में वक्री नहीं होते; राहु-केतु सदा उल्टी चाल चलते हैं।
अपनी जन्म कुंडली पर गोचर देखें, आने वाले महीनों की समयरेखा के साथ।
ग्रहण और वक्री ग्रहअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2026 में शुक्र वक्री कब हैं?
3 अक्टूबर 2026 – 14 नवंबर 2026
शुक्र वक्री का क्या अर्थ है?
शुक्र प्रेम, विवाह, सौंदर्य, कला और विलासिता के कारक हैं। वक्री शुक्र पुराने रिश्ते और भावनाएँ समीक्षा के लिए वापस लाते हैं, और धन व भोग के निर्णय कम भरोसेमंद रहते हैं। परंपरा से शुक्र वक्री में विवाह मुहूर्त टाले जाते हैं।
शुक्र वक्री में क्या करना चाहिए?
विवाह की शुरुआत या विलासिता की खरीद टालें; रिश्तों और खर्च की शांति से समीक्षा करें। शुक्रवार को लक्ष्मी पूजा करें और सादगी रखें।