वक्री ग्रह
शनि वक्री 2026: तिथियाँ और अर्थ
शनि 2026 में 1 बार वक्री होंगे। तिथियाँ भारतीय समय में हैं; राशि निरयण (लाहिड़ी) है।
| वक्री आरंभ | मार्गी | दिन | राशि |
|---|---|---|---|
| 26 जुलाई 2026 | 11 दिसंबर 2026 | 137 | मीन |
शनि वक्री का अर्थ
शनि कर्म, अनुशासन, विलंब और कर्मफल के कारक हैं। वक्री शनि अधूरे कर्तव्यों पर लौटते हैं; पुराने कर्मों के पाठ लौटते हैं और पुराने ऋण या काम पूरे करने की माँग करते हैं। धैर्य और ईमानदार मेहनत को शॉर्टकट से अधिक फल मिलता है।
क्या करें और क्या न करें
लंबित कर्तव्य और ऋण चुकाएँ, देरी में धैर्य रखें और ज़रूरतमंदों की सेवा करें। शनिवार को तिल के तेल का दीपक जलाएँ।
सूर्य, चंद्र, राहु और केतु सामान्य अर्थ में वक्री नहीं होते; राहु-केतु सदा उल्टी चाल चलते हैं।
अपनी जन्म कुंडली पर गोचर देखें, आने वाले महीनों की समयरेखा के साथ।
ग्रहण और वक्री ग्रहअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2026 में शनि वक्री कब हैं?
26 जुलाई 2026 – 11 दिसंबर 2026
शनि वक्री का क्या अर्थ है?
शनि कर्म, अनुशासन, विलंब और कर्मफल के कारक हैं। वक्री शनि अधूरे कर्तव्यों पर लौटते हैं; पुराने कर्मों के पाठ लौटते हैं और पुराने ऋण या काम पूरे करने की माँग करते हैं। धैर्य और ईमानदार मेहनत को शॉर्टकट से अधिक फल मिलता है।
शनि वक्री में क्या करना चाहिए?
लंबित कर्तव्य और ऋण चुकाएँ, देरी में धैर्य रखें और ज़रूरतमंदों की सेवा करें। शनिवार को तिल के तेल का दीपक जलाएँ।