विंशोत्तरी दशा
केतु महादशा: फल, अंतर्दशा और उपाय
केतु महादशा सात वर्ष की होती है और मन को भीतर मोड़ती है: वैराग्य, आध्यात्मिकता, शोध और ऐसे अंत जो नई शुरुआत की जगह बनाते हैं।
| अवधि | 7 वर्ष |
|---|---|
| क्रम | बुध के बाद और शुक्र से पहले |
| इसके नक्षत्र | अश्विनी, मघा, और मूल |
| मंत्र | ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः |
केतु महादशा के बारे में
केतु महादशा सात वर्ष की होती है और मन को भीतर मोड़ती है: वैराग्य, आध्यात्मिकता, शोध और ऐसे अंत जो नई शुरुआत की जगह बनाते हैं।
कब शुभ फल देती है
अच्छी स्थिति में केतु आध्यात्मिक प्रगति, अंतर्दृष्टि, शोध कौशल, उपचार क्षमता और पुराने बोझ से मुक्ति देता है।
कब कठिन होती है
पीड़ित केतु भ्रम, अचानक अलगाव, छिपे रोग, दुर्घटना और खालीपन का भाव लाता है।
केतु महादशा में अंतर्दशाएँ
| अंतर्दशा | अवधि | सामान्य स्वरूप |
|---|---|---|
| केतु–केतु | 0 वर्ष 5 माह | मित्रवत |
| केतु–शुक्र | 1 वर्ष 2 माह | मिश्रित |
| केतु–सूर्य | 0 वर्ष 4 माह | मिश्रित |
| केतु–चंद्र | 0 वर्ष 7 माह | मिश्रित |
| केतु–मंगल | 0 वर्ष 5 माह | मिश्रित |
| केतु–राहु | 1 वर्ष 1 माह | मिश्रित |
| केतु–गुरु | 0 वर्ष 11 माह | मिश्रित |
| केतु–शनि | 1 वर्ष 1 माह | मिश्रित |
| केतु–बुध | 0 वर्ष 12 माह | मिश्रित |
स्वरूप केवल दोनों ग्रहों की नैसर्गिक मित्रता दिखाता है। वास्तविक फल आपकी कुंडली में दोनों की स्थिति पर निर्भर है।
केतु महादशा के उपाय
- ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः का 108 बार जप करें, विशेषकर मंगलवार को।
- लहसुनिया रत्न
- 9 मुखी रुद्राक्ष
अपनी दशा की पूरी समयरेखा हर अंतर्दशा और तिथियों के साथ देखें।
मेरी कुंडली बनाएँअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
केतु महादशा कितने वर्ष की होती है?
विंशोत्तरी पद्धति में केतु महादशा 7 वर्ष की होती है।
केतु महादशा शुभ है या अशुभ?
अच्छी स्थिति में केतु आध्यात्मिक प्रगति, अंतर्दृष्टि, शोध कौशल, उपचार क्षमता और पुराने बोझ से मुक्ति देता है। पीड़ित केतु भ्रम, अचानक अलगाव, छिपे रोग, दुर्घटना और खालीपन का भाव लाता है।
केतु महादशा के उपाय क्या हैं?
ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः का जप करें, विशेषकर मंगलवार को; रत्न तभी पहनें जब लग्न के अनुकूल हो; और ग्रह से जुड़ा दान करें।