विंशोत्तरी दशा
सूर्य महादशा: फल, अंतर्दशा और उपाय
सूर्य महादशा छह वर्ष की होती है और आत्मा, अहं, पिता, सरकार और अधिकार को केंद्र में लाती है।
| अवधि | 6 वर्ष |
|---|---|
| क्रम | शुक्र के बाद और चंद्र से पहले |
| इसके नक्षत्र | कृत्तिका, उत्तरा फाल्गुनी, और उत्तराषाढ़ा |
| मंत्र | ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः |
सूर्य महादशा के बारे में
सूर्य महादशा छह वर्ष की होती है और आत्मा, अहं, पिता, सरकार और अधिकार को केंद्र में लाती है। यह अपने पैरों पर खड़े होने और पहचान पाने का समय है।
कब शुभ फल देती है
बलवान सूर्य (मेष, सिंह में या भाव 1, 9, 10, 11 में) पदोन्नति, सरकारी कृपा, सम्मान, नेतृत्व और अच्छा स्वास्थ्य देता है।
कब कठिन होती है
कमज़ोर या पीड़ित सूर्य अहं का टकराव, पिता या अधिकारियों से मतभेद, हृदय, नेत्र या हड्डी की तकलीफ़ और प्रतिष्ठा की हानि दे सकता है।
सूर्य महादशा में अंतर्दशाएँ
| अंतर्दशा | अवधि | सामान्य स्वरूप |
|---|---|---|
| सूर्य–सूर्य | 0 वर्ष 4 माह | मित्रवत |
| सूर्य–चंद्र | 0 वर्ष 6 माह | मित्रवत |
| सूर्य–मंगल | 0 वर्ष 4 माह | मित्रवत |
| सूर्य–राहु | 0 वर्ष 11 माह | मिश्रित |
| सूर्य–गुरु | 0 वर्ष 10 माह | मित्रवत |
| सूर्य–शनि | 0 वर्ष 11 माह | सावधानी |
| सूर्य–बुध | 0 वर्ष 10 माह | मिश्रित |
| सूर्य–केतु | 0 वर्ष 4 माह | मिश्रित |
| सूर्य–शुक्र | 1 वर्ष 0 माह | सावधानी |
स्वरूप केवल दोनों ग्रहों की नैसर्गिक मित्रता दिखाता है। वास्तविक फल आपकी कुंडली में दोनों की स्थिति पर निर्भर है।
सूर्य महादशा के उपाय
- ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः का 108 बार जप करें, विशेषकर रविवार को।
- माणिक्य (रूबी) रत्न
- 1 मुखी रुद्राक्ष
अपनी दशा की पूरी समयरेखा हर अंतर्दशा और तिथियों के साथ देखें।
मेरी कुंडली बनाएँअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सूर्य महादशा कितने वर्ष की होती है?
विंशोत्तरी पद्धति में सूर्य महादशा 6 वर्ष की होती है।
सूर्य महादशा शुभ है या अशुभ?
बलवान सूर्य (मेष, सिंह में या भाव 1, 9, 10, 11 में) पदोन्नति, सरकारी कृपा, सम्मान, नेतृत्व और अच्छा स्वास्थ्य देता है। कमज़ोर या पीड़ित सूर्य अहं का टकराव, पिता या अधिकारियों से मतभेद, हृदय, नेत्र या हड्डी की तकलीफ़ और प्रतिष्ठा की हानि दे सकता है।
सूर्य महादशा के उपाय क्या हैं?
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः का जप करें, विशेषकर रविवार को; रत्न तभी पहनें जब लग्न के अनुकूल हो; और ग्रह से जुड़ा दान करें।