विंशोत्तरी दशा
शनि महादशा: फल, अंतर्दशा और उपाय
शनि महादशा उन्नीस वर्ष की होती है।
| अवधि | 19 वर्ष |
|---|---|
| क्रम | गुरु के बाद और बुध से पहले |
| इसके नक्षत्र | पुष्य, अनुराधा, और उत्तरा भाद्रपद |
| मंत्र | ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः |
शनि महादशा के बारे में
शनि महादशा उन्नीस वर्ष की होती है। यह परखती है और फिर पुरस्कार देती है: मेहनत, अनुशासन और धैर्य स्थायी परिणाम बनाते हैं।
कब शुभ फल देती है
अच्छी स्थिति में शनि (वृषभ और तुला लग्न के लिए योगकारक, या भाव 3, 6, 10, 11 में) स्थिर करियर, अधिकार, संपत्ति और दीर्घकालिक सफलता देता है।
कब कठिन होती है
बुरी स्थिति में शनि विलंब, भारी ज़िम्मेदारी, पुराने रोग, अकेलापन और धैर्य माँगने वाली रुकावटें लाता है।
शनि महादशा में अंतर्दशाएँ
| अंतर्दशा | अवधि | सामान्य स्वरूप |
|---|---|---|
| शनि–शनि | 3 वर्ष 0 माह | मित्रवत |
| शनि–बुध | 2 वर्ष 8 माह | मित्रवत |
| शनि–केतु | 1 वर्ष 1 माह | मिश्रित |
| शनि–शुक्र | 3 वर्ष 2 माह | मित्रवत |
| शनि–सूर्य | 0 वर्ष 11 माह | सावधानी |
| शनि–चंद्र | 1 वर्ष 7 माह | सावधानी |
| शनि–मंगल | 1 वर्ष 1 माह | सावधानी |
| शनि–राहु | 2 वर्ष 10 माह | मिश्रित |
| शनि–गुरु | 2 वर्ष 6 माह | मिश्रित |
स्वरूप केवल दोनों ग्रहों की नैसर्गिक मित्रता दिखाता है। वास्तविक फल आपकी कुंडली में दोनों की स्थिति पर निर्भर है।
शनि महादशा के उपाय
- ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः का 108 बार जप करें, विशेषकर शनिवार को।
- नीलम रत्न
- 7 मुखी रुद्राक्ष
अपनी दशा की पूरी समयरेखा हर अंतर्दशा और तिथियों के साथ देखें।
मेरी कुंडली बनाएँअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शनि महादशा कितने वर्ष की होती है?
विंशोत्तरी पद्धति में शनि महादशा 19 वर्ष की होती है।
शनि महादशा शुभ है या अशुभ?
अच्छी स्थिति में शनि (वृषभ और तुला लग्न के लिए योगकारक, या भाव 3, 6, 10, 11 में) स्थिर करियर, अधिकार, संपत्ति और दीर्घकालिक सफलता देता है। बुरी स्थिति में शनि विलंब, भारी ज़िम्मेदारी, पुराने रोग, अकेलापन और धैर्य माँगने वाली रुकावटें लाता है।
शनि महादशा के उपाय क्या हैं?
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः का जप करें, विशेषकर शनिवार को; रत्न तभी पहनें जब लग्न के अनुकूल हो; और ग्रह से जुड़ा दान करें।