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दुरुधरा योग: अर्थ, निर्माण और फल

दुरुधरा योग तब बनता है जब सूर्य के अलावा ग्रह चंद्रमा से दूसरे और बारहवें दोनों भावों में हों।

कैसे बनता हैचंद्रमा के दोनों ओर ग्रह (उससे भाव 2 और 12)
प्रकारशुभ योग

दुरुधरा योग क्या है?

दुरुधरा योग तब बनता है जब सूर्य के अलावा ग्रह चंद्रमा से दूसरे और बारहवें दोनों भावों में हों।

फल

यह धन, वाहन, सेवक, उदारता और यश देता है; चंद्रमा दोनों ओर से सहारा पाता है।

कब बलवान या कमज़ोर

दोनों ओर शुभ ग्रह हों तो सबसे अच्छा; यह केमद्रुम योग को भी भंग करता है।

कोई भी एक स्थिति अकेले नहीं पढ़ी जाती: राशि, दृष्टि, युति, दशा और पूरी कुंडली परिणाम बदलते हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुरुधरा योग कैसे बनता है?
चंद्रमा के दोनों ओर ग्रह (उससे भाव 2 और 12)
दुरुधरा योग के क्या फल हैं?
यह धन, वाहन, सेवक, उदारता और यश देता है; चंद्रमा दोनों ओर से सहारा पाता है।
दुरुधरा योग पूरा फल कब देता है?
दोनों ओर शुभ ग्रह हों तो सबसे अच्छा; यह केमद्रुम योग को भी भंग करता है।

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