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राज योग: अर्थ, निर्माण और फल

राजयोग तब बनता है जब केंद्र (1, 4, 7, 10) का स्वामी और त्रिकोण (1, 5, 9) का स्वामी साथ हों, एक-दूसरे को देखें या राशि परिवर्तन करें।

कैसे बनता हैकेंद्र का स्वामी और त्रिकोण का स्वामी एक ही राशि में
प्रकारशुभ योग

राज योग क्या है?

राजयोग तब बनता है जब केंद्र (1, 4, 7, 10) का स्वामी और त्रिकोण (1, 5, 9) का स्वामी साथ हों, एक-दूसरे को देखें या राशि परिवर्तन करें। यह प्रयास (केंद्र) को भाग्य (त्रिकोण) से जोड़ता है।

फल

यह पद, अधिकार, धन और सम्मान में वृद्धि देता है, प्रायः इसे बनाने वाले ग्रहों की दशा में।

कब बलवान या कमज़ोर

यह तब सबसे बलवान है जब ग्रह अच्छी स्थिति में और बलवान हों, और मुख्यतः उनकी दशा-अंतर्दशा में फल देता है। यदि वे 6, 8 या 12 के भी स्वामी हों, या नीच या अस्त हों, तो योग कमज़ोर होता है।

कोई भी एक स्थिति अकेले नहीं पढ़ी जाती: राशि, दृष्टि, युति, दशा और पूरी कुंडली परिणाम बदलते हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राज योग कैसे बनता है?
केंद्र का स्वामी और त्रिकोण का स्वामी एक ही राशि में
राज योग के क्या फल हैं?
यह पद, अधिकार, धन और सम्मान में वृद्धि देता है, प्रायः इसे बनाने वाले ग्रहों की दशा में।
राज योग पूरा फल कब देता है?
यह तब सबसे बलवान है जब ग्रह अच्छी स्थिति में और बलवान हों, और मुख्यतः उनकी दशा-अंतर्दशा में फल देता है। यदि वे 6, 8 या 12 के भी स्वामी हों, या नीच या अस्त हों, तो योग कमज़ोर होता है।

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