ज्योतिष के योग
ग्रहण दोष: अर्थ, निर्माण और फल
ग्रहण योग तब बनता है जब सूर्य या चंद्रमा राहु या केतु के साथ एक ही राशि में हों।
| कैसे बनता है | सूर्य या चंद्र राहु या केतु के साथ एक राशि में |
|---|---|
| प्रकार | कठिन योग |
ग्रहण दोष क्या है?
ग्रहण योग तब बनता है जब सूर्य या चंद्रमा राहु या केतु के साथ एक ही राशि में हों। छाया ग्रह प्रकाश ग्रह को 'ग्रस' लेता है।
फल
सूर्य के साथ यह आत्मविश्वास, पिता और प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकता है; चंद्रमा के साथ चिंता, भ्रम और मनोदशा में उतार-चढ़ाव ला सकता है।
कब बलवान या कमज़ोर
जब प्रकाश ग्रह राहु-केतु से अंशों में दूर हो या राशि से बलवान हो तब यह हल्का होता है। उपाय हैं सूर्य या चंद्र मंत्र का जप और ग्रहण के दिन पूजा।
कोई भी एक स्थिति अकेले नहीं पढ़ी जाती: राशि, दृष्टि, युति, दशा और पूरी कुंडली परिणाम बदलते हैं।
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ग्रहण दोष कैसे बनता है?
सूर्य या चंद्र राहु या केतु के साथ एक राशि में
ग्रहण दोष के क्या फल हैं?
सूर्य के साथ यह आत्मविश्वास, पिता और प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकता है; चंद्रमा के साथ चिंता, भ्रम और मनोदशा में उतार-चढ़ाव ला सकता है।
ग्रहण दोष पूरा फल कब देता है?
जब प्रकाश ग्रह राहु-केतु से अंशों में दूर हो या राशि से बलवान हो तब यह हल्का होता है। उपाय हैं सूर्य या चंद्र मंत्र का जप और ग्रहण के दिन पूजा।