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मिथुन (मिथुन) में राहु: अर्थ और फल
राहु सम राशि में हैं: मिथुन के स्वामी बुध हैं। उनके फल मुख्यतः भाव और दृष्टियों पर निर्भर करते हैं।
| बल (अवस्था) | सम राशि |
|---|---|
| स्वामी | बुध |
| तत्व | वायु |
| स्वभाव | द्विस्वभाव |
| गोचर | राहु अगली बार 11 अक्टूबर 2037 से 30 अप्रैल 2039 तक मिथुन में होंगे। |
आपकी कुंडली में मिथुन में राहु
राहु सम राशि में हैं: मिथुन के स्वामी बुध हैं। उनके फल मुख्यतः भाव और दृष्टियों पर निर्भर करते हैं।
राहु महत्वाकांक्षा, विदेश, तकनीक और इच्छा के कारक हैं। मिथुन में ये विषय राशि का रंग लेते हैं: मिथुन चंद्र जिज्ञासु, विनोदी और चंचल मन देता है जिसे बातचीत, सीखना और विविधता पसंद है।
वायु राशि में राहु विचारों, संवाद और संबंधों के माध्यम से काम करते हैं।
हर लग्न के लिए मिथुन में राहु
कोई भी एक स्थिति अकेले नहीं पढ़ी जाती: राशि, दृष्टि, युति, दशा और पूरी कुंडली परिणाम बदलते हैं।
अपनी कुंडली में देखें कि राहु कहाँ हैं और क्या कर रहे हैं।
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क्या मिथुन में राहु शुभ है?
राहु सम राशि में हैं: मिथुन के स्वामी बुध हैं। उनके फल मुख्यतः भाव और दृष्टियों पर निर्भर करते हैं।
मिथुन में राहु का क्या अर्थ है?
राहु महत्वाकांक्षा, विदेश, तकनीक और इच्छा के कारक हैं। मिथुन में ये विषय राशि का रंग लेते हैं: मिथुन चंद्र जिज्ञासु, विनोदी और चंचल मन देता है जिसे बातचीत, सीखना और विविधता पसंद है।
राहु मिथुन में कब होंगे?
राहु अगली बार 11 अक्टूबर 2037 से 30 अप्रैल 2039 तक मिथुन में होंगे।