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मिथुन (मिथुन) में केतु: अर्थ और फल
केतु सम राशि में हैं: मिथुन के स्वामी बुध हैं। उनके फल मुख्यतः भाव और दृष्टियों पर निर्भर करते हैं।
| बल (अवस्था) | सम राशि |
|---|---|
| स्वामी | बुध |
| तत्व | वायु |
| स्वभाव | द्विस्वभाव |
| गोचर | केतु अगली बार 24 जून 2028 से 11 जनवरी 2030 तक मिथुन में होंगे। |
आपकी कुंडली में मिथुन में केतु
केतु सम राशि में हैं: मिथुन के स्वामी बुध हैं। उनके फल मुख्यतः भाव और दृष्टियों पर निर्भर करते हैं।
केतु वैराग्य, अंतर्ज्ञान, अध्यात्म और पूर्व कर्म के कारक हैं। मिथुन में ये विषय राशि का रंग लेते हैं: मिथुन चंद्र जिज्ञासु, विनोदी और चंचल मन देता है जिसे बातचीत, सीखना और विविधता पसंद है।
वायु राशि में केतु विचारों, संवाद और संबंधों के माध्यम से काम करते हैं।
हर लग्न के लिए मिथुन में केतु
कोई भी एक स्थिति अकेले नहीं पढ़ी जाती: राशि, दृष्टि, युति, दशा और पूरी कुंडली परिणाम बदलते हैं।
अपनी कुंडली में देखें कि केतु कहाँ हैं और क्या कर रहे हैं।
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क्या मिथुन में केतु शुभ है?
केतु सम राशि में हैं: मिथुन के स्वामी बुध हैं। उनके फल मुख्यतः भाव और दृष्टियों पर निर्भर करते हैं।
मिथुन में केतु का क्या अर्थ है?
केतु वैराग्य, अंतर्ज्ञान, अध्यात्म और पूर्व कर्म के कारक हैं। मिथुन में ये विषय राशि का रंग लेते हैं: मिथुन चंद्र जिज्ञासु, विनोदी और चंचल मन देता है जिसे बातचीत, सीखना और विविधता पसंद है।
केतु मिथुन में कब होंगे?
केतु अगली बार 24 जून 2028 से 11 जनवरी 2030 तक मिथुन में होंगे।