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कर्क (कर्क) में केतु: अर्थ और फल
केतु सम राशि में हैं: कर्क के स्वामी चंद्र हैं। उनके फल मुख्यतः भाव और दृष्टियों पर निर्भर करते हैं।
| बल (अवस्था) | सम राशि |
|---|---|
| स्वामी | चंद्र |
| तत्व | जल |
| स्वभाव | चर |
| गोचर | केतु अगली बार 5 दिसंबर 2026 से 24 जून 2028 तक कर्क में होंगे। |
आपकी कुंडली में कर्क में केतु
केतु सम राशि में हैं: कर्क के स्वामी चंद्र हैं। उनके फल मुख्यतः भाव और दृष्टियों पर निर्भर करते हैं।
केतु वैराग्य, अंतर्ज्ञान, अध्यात्म और पूर्व कर्म के कारक हैं। कर्क में ये विषय राशि का रंग लेते हैं: कर्क चंद्रमा की अपनी राशि है: संवेदनशील, देखभाल करने वाली और घर, माँ व परिवार से गहराई से जुड़ी।
जल राशि में केतु भावना, अंतर्ज्ञान और देखभाल के माध्यम से काम करते हैं।
हर लग्न के लिए कर्क में केतु
कोई भी एक स्थिति अकेले नहीं पढ़ी जाती: राशि, दृष्टि, युति, दशा और पूरी कुंडली परिणाम बदलते हैं।
अपनी कुंडली में देखें कि केतु कहाँ हैं और क्या कर रहे हैं।
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क्या कर्क में केतु शुभ है?
केतु सम राशि में हैं: कर्क के स्वामी चंद्र हैं। उनके फल मुख्यतः भाव और दृष्टियों पर निर्भर करते हैं।
कर्क में केतु का क्या अर्थ है?
केतु वैराग्य, अंतर्ज्ञान, अध्यात्म और पूर्व कर्म के कारक हैं। कर्क में ये विषय राशि का रंग लेते हैं: कर्क चंद्रमा की अपनी राशि है: संवेदनशील, देखभाल करने वाली और घर, माँ व परिवार से गहराई से जुड़ी।
केतु कर्क में कब होंगे?
केतु अगली बार 5 दिसंबर 2026 से 24 जून 2028 तक कर्क में होंगे।