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कन्या (कन्या) में केतु: अर्थ और फल
केतु सम राशि में हैं: कन्या के स्वामी बुध हैं। उनके फल मुख्यतः भाव और दृष्टियों पर निर्भर करते हैं।
| बल (अवस्था) | सम राशि |
|---|---|
| स्वामी | बुध |
| तत्व | पृथ्वी |
| स्वभाव | द्विस्वभाव |
| गोचर | केतु अगली बार 6 जून 2042 से 24 दिसंबर 2043 तक कन्या में होंगे। |
आपकी कुंडली में कन्या में केतु
केतु सम राशि में हैं: कन्या के स्वामी बुध हैं। उनके फल मुख्यतः भाव और दृष्टियों पर निर्भर करते हैं।
केतु वैराग्य, अंतर्ज्ञान, अध्यात्म और पूर्व कर्म के कारक हैं। कन्या में ये विषय राशि का रंग लेते हैं: कन्या चंद्र विश्लेषणात्मक, सावधान और सेवाभावी स्वभाव देता है।
पृथ्वी राशि में केतु व्यावहारिक, स्थिर और भौतिक तरीके से काम करते हैं।
हर लग्न के लिए कन्या में केतु
कोई भी एक स्थिति अकेले नहीं पढ़ी जाती: राशि, दृष्टि, युति, दशा और पूरी कुंडली परिणाम बदलते हैं।
अपनी कुंडली में देखें कि केतु कहाँ हैं और क्या कर रहे हैं।
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क्या कन्या में केतु शुभ है?
केतु सम राशि में हैं: कन्या के स्वामी बुध हैं। उनके फल मुख्यतः भाव और दृष्टियों पर निर्भर करते हैं।
कन्या में केतु का क्या अर्थ है?
केतु वैराग्य, अंतर्ज्ञान, अध्यात्म और पूर्व कर्म के कारक हैं। कन्या में ये विषय राशि का रंग लेते हैं: कन्या चंद्र विश्लेषणात्मक, सावधान और सेवाभावी स्वभाव देता है।
केतु कन्या में कब होंगे?
केतु अगली बार 6 जून 2042 से 24 दिसंबर 2043 तक कन्या में होंगे।