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वृश्चिक (वृश्चिक) में केतु: अर्थ और फल

केतु वृश्चिक में उच्च के हैं: यह उनकी सबसे बलवान राशि है। अस्त या भारी पीड़ित न हों तो वे अपने कारकत्व खुलकर और उदारता से देते हैं।

बल (अवस्था)उच्च (अति बलवान)
स्वामीमंगल
तत्वजल
स्वभावस्थिर
गोचरकेतु अगली बार 30 अप्रैल 2039 से 17 नवंबर 2040 तक वृश्चिक में होंगे।

आपकी कुंडली में वृश्चिक में केतु

केतु वृश्चिक में उच्च के हैं: यह उनकी सबसे बलवान राशि है। अस्त या भारी पीड़ित न हों तो वे अपने कारकत्व खुलकर और उदारता से देते हैं।

केतु वैराग्य, अंतर्ज्ञान, अध्यात्म और पूर्व कर्म के कारक हैं। वृश्चिक में ये विषय राशि का रंग लेते हैं: वृश्चिक चंद्रमा की नीच राशि है, जो तीव्र, निजी और प्रबल भावनाएँ देती है।

जल राशि में केतु भावना, अंतर्ज्ञान और देखभाल के माध्यम से काम करते हैं।

हर लग्न के लिए वृश्चिक में केतु

लग्नभावस्वामी भाव
मेषभाव 8 (आयु, रहस्य और अचानक घटनाएँ)—
वृषभभाव 7 (विवाह और साझेदारी)—
मिथुनभाव 6 (शत्रु, ऋण, स्वास्थ्य और सेवा)—
कर्कभाव 5 (संतान, बुद्धि और रचनात्मकता)—
सिंहभाव 4 (घर, माता और सुख)—
कन्याभाव 3 (साहस, भाई-बहन और पराक्रम)—
तुलाभाव 2 (धन, परिवार और वाणी)—
वृश्चिकभाव 1 (स्वयं, शरीर और व्यक्तित्व)—
धनुभाव 12 (व्यय, विदेश और मोक्ष)—
मकरभाव 11 (लाभ, आय और मित्र)—
कुम्भभाव 10 (करियर, पद और कर्म)—
मीनभाव 9 (भाग्य, धर्म, पिता और उच्च शिक्षा)—

कोई भी एक स्थिति अकेले नहीं पढ़ी जाती: राशि, दृष्टि, युति, दशा और पूरी कुंडली परिणाम बदलते हैं।

अपनी कुंडली में देखें कि केतु कहाँ हैं और क्या कर रहे हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या वृश्चिक में केतु शुभ है?
केतु वृश्चिक में उच्च के हैं: यह उनकी सबसे बलवान राशि है। अस्त या भारी पीड़ित न हों तो वे अपने कारकत्व खुलकर और उदारता से देते हैं।
वृश्चिक में केतु का क्या अर्थ है?
केतु वैराग्य, अंतर्ज्ञान, अध्यात्म और पूर्व कर्म के कारक हैं। वृश्चिक में ये विषय राशि का रंग लेते हैं: वृश्चिक चंद्रमा की नीच राशि है, जो तीव्र, निजी और प्रबल भावनाएँ देती है।
केतु वृश्चिक में कब होंगे?
केतु अगली बार 30 अप्रैल 2039 से 17 नवंबर 2040 तक वृश्चिक में होंगे।

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