नक्षत्र
भरणी नक्षत्र
भरणी दृढ़ इच्छाशक्ति, जोश और भारी ज़िम्मेदारी उठाने की क्षमता देता है।
| विस्तार | मेष 13° 20′ – मेष 26° 40′ |
|---|---|
| स्वामी ग्रह | शुक्र |
| देवता | यम |
| प्रतीक | योनि |
| गण | मनुष्य |
| योनि (पशु) | गज |
| नाड़ी | मध्य (पित्त) |
| राशि | मेष |
| रत्न (स्वामी का) | हीरा |
भरणी का स्वभाव
भरणी दृढ़ इच्छाशक्ति, जोश और भारी ज़िम्मेदारी उठाने की क्षमता देता है। ये जातक रचनात्मक और दृढ़ होते हैं, जीवन को तीव्रता से जीते हैं, और आत्म-संयम से अतियों को संभालना सीखते हैं।
इसका स्वामी शुक्र प्रेम, विवाह, कला और सुख-सुविधा का कारक है, और यहाँ चंद्रमा वाले जातकों की पहली दशा इसी की होती है।
चारों पद
- पद 1 · मेष 13° 20′ – मेष 16° 40′ · सिंह नवांश · नामाक्षर: ली
- पद 2 · मेष 16° 40′ – मेष 20° · कन्या नवांश · नामाक्षर: लू
- पद 3 · मेष 20° – मेष 23° 20′ · तुला नवांश · नामाक्षर: ले
- पद 4 · मेष 23° 20′ – मेष 26° 40′ · वृश्चिक नवांश · नामाक्षर: लो
अनुकूलता
गुण मिलान के अनुसार सबसे अनुकूल नक्षत्र हैं अश्विनी, स्वाति, कृत्तिका, श्रवण, और आर्द्रा।
सबसे कम अनुकूल हैं अनुराधा, धनिष्ठा, और चित्रा।
मध्य पदों के लिए 36 गुण के अष्टकूट से निकाला गया; आपके सटीक पद और पूरी कुंडली इसे बदल सकते हैं।
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शिशु नाम