नक्षत्र
चित्रा नक्षत्र
चित्रा, चमकता रत्न, सौंदर्य, डिज़ाइन और शिल्प का प्रेम देता है।
| विस्तार | कन्या 23° 20′ – तुला 6° 40′ |
|---|---|
| स्वामी ग्रह | मंगल |
| देवता | विश्वकर्मा |
| प्रतीक | चमकता रत्न |
| गण | राक्षस |
| योनि (पशु) | व्याघ्र |
| नाड़ी | मध्य (पित्त) |
| राशि | कन्या और तुला |
| रत्न (स्वामी का) | मूंगा |
चित्रा का स्वभाव
चित्रा, चमकता रत्न, सौंदर्य, डिज़ाइन और शिल्प का प्रेम देता है। इसके जातक रचनात्मक, सुरुचिपूर्ण और करिश्माई होते हैं, वास्तुकला, कला और अच्छी बनावट वाली हर चीज़ में प्रतिभाशाली।
इसका स्वामी मंगल ऊर्जा, साहस, भाई-बहन और संपत्ति का कारक है, और यहाँ चंद्रमा वाले जातकों की पहली दशा इसी की होती है।
चारों पद
- पद 1 · कन्या 23° 20′ – कन्या 26° 40′ · सिंह नवांश · नामाक्षर: पे
- पद 2 · कन्या 26° 40′ – तुला 0° · कन्या नवांश · नामाक्षर: पो
- पद 3 · तुला 0° – तुला 3° 20′ · तुला नवांश · नामाक्षर: रा
- पद 4 · तुला 3° 20′ – तुला 6° 40′ · वृश्चिक नवांश · नामाक्षर: री
अनुकूलता
गुण मिलान के अनुसार सबसे अनुकूल नक्षत्र हैं आर्द्रा, विशाखा, हस्त, मूल, और पुनर्वसु।
सबसे कम अनुकूल हैं उत्तरा भाद्रपद, पूर्वा फाल्गुनी, और भरणी।
मध्य पदों के लिए 36 गुण के अष्टकूट से निकाला गया; आपके सटीक पद और पूरी कुंडली इसे बदल सकते हैं।
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शिशु नाम