नक्षत्र
मृगशिरा नक्षत्र
मृगशिरा खोजी नक्षत्र है: जिज्ञासु, कोमल, बुद्धिमान और हमेशा कुछ नया खोजता हुआ।
| विस्तार | वृषभ 23° 20′ – मिथुन 6° 40′ |
|---|---|
| स्वामी ग्रह | मंगल |
| देवता | सोम (चंद्र) |
| प्रतीक | हिरण का सिर |
| गण | देव |
| योनि (पशु) | सर्प |
| नाड़ी | मध्य (पित्त) |
| राशि | वृषभ और मिथुन |
| रत्न (स्वामी का) | मूंगा |
मृगशिरा का स्वभाव
मृगशिरा खोजी नक्षत्र है: जिज्ञासु, कोमल, बुद्धिमान और हमेशा कुछ नया खोजता हुआ। इसके जातक अच्छे संवादक और शोधकर्ता होते हैं, यद्यपि बेचैनी उन्हें एक से दूसरी चीज़ पर ले जा सकती है।
इसका स्वामी मंगल ऊर्जा, साहस, भाई-बहन और संपत्ति का कारक है, और यहाँ चंद्रमा वाले जातकों की पहली दशा इसी की होती है।
चारों पद
- पद 1 · वृषभ 23° 20′ – वृषभ 26° 40′ · सिंह नवांश · नामाक्षर: वे
- पद 2 · वृषभ 26° 40′ – मिथुन 0° · कन्या नवांश · नामाक्षर: वो
- पद 3 · मिथुन 0° – मिथुन 3° 20′ · तुला नवांश · नामाक्षर: का
- पद 4 · मिथुन 3° 20′ – मिथुन 6° 40′ · वृश्चिक नवांश · नामाक्षर: की
अनुकूलता
गुण मिलान के अनुसार सबसे अनुकूल नक्षत्र हैं रोहिणी, पूर्वा भाद्रपद, शतभिषा, श्रवण, और रेवती।
सबसे कम अनुकूल हैं धनिष्ठा, चित्रा, और पूर्वाषाढ़ा।
मध्य पदों के लिए 36 गुण के अष्टकूट से निकाला गया; आपके सटीक पद और पूरी कुंडली इसे बदल सकते हैं।
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शिशु नाम