नक्षत्र
स्वाति नक्षत्र
स्वाति, हवा से हिलता स्वतंत्र अंकुर, लचीलापन, कूटनीति और स्वतंत्रता का प्रेम देता है।
| विस्तार | तुला 6° 40′ – तुला 20° |
|---|---|
| स्वामी ग्रह | राहु |
| देवता | वायु |
| प्रतीक | नया अंकुर |
| गण | देव |
| योनि (पशु) | महिष |
| नाड़ी | अंत्य (कफ) |
| राशि | तुला |
| रत्न (स्वामी का) | गोमेद |
स्वाति का स्वभाव
स्वाति, हवा से हिलता स्वतंत्र अंकुर, लचीलापन, कूटनीति और स्वतंत्रता का प्रेम देता है। इसके जातक न्यायप्रिय, व्यापार में कुशल होते हैं और अपना रास्ता खुद चुनने पर फलते-फूलते हैं।
इसका स्वामी राहु महत्वाकांक्षा, विदेश, तकनीक और इच्छा का कारक है, और यहाँ चंद्रमा वाले जातकों की पहली दशा इसी की होती है।
चारों पद
- पद 1 · तुला 6° 40′ – तुला 10° · धनु नवांश · नामाक्षर: रू
- पद 2 · तुला 10° – तुला 13° 20′ · मकर नवांश · नामाक्षर: रे
- पद 3 · तुला 13° 20′ – तुला 16° 40′ · कुम्भ नवांश · नामाक्षर: रो
- पद 4 · तुला 16° 40′ – तुला 20° · मीन नवांश · नामाक्षर: ता
अनुकूलता
गुण मिलान के अनुसार सबसे अनुकूल नक्षत्र हैं भरणी, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, और आर्द्रा।
सबसे कम अनुकूल हैं आश्लेषा, रेवती, और मघा।
मध्य पदों के लिए 36 गुण के अष्टकूट से निकाला गया; आपके सटीक पद और पूरी कुंडली इसे बदल सकते हैं।
स्वाति नक्षत्र के अक्षरों से शिशु के नाम खोजें।
शिशु नाम