नक्षत्र
ज्येष्ठा नक्षत्र
ज्येष्ठा सबसे बड़ा है: ज़िम्मेदार, रक्षक और सक्षम, स्वाभाविक वरिष्ठता वाला।
| विस्तार | वृश्चिक 16° 40′ – धनु 0° |
|---|---|
| स्वामी ग्रह | बुध |
| देवता | इंद्र |
| प्रतीक | कुंडल या छत्र |
| गण | राक्षस |
| योनि (पशु) | मृग |
| नाड़ी | आदि (वात) |
| राशि | वृश्चिक |
| रत्न (स्वामी का) | पन्ना |
ज्येष्ठा का स्वभाव
ज्येष्ठा सबसे बड़ा है: ज़िम्मेदार, रक्षक और सक्षम, स्वाभाविक वरिष्ठता वाला। इसके जातक साहसी और साधन-संपन्न होते हैं, अक्सर परिवार का भार उठाते हैं, और शक्ति का कोमलता से उपयोग करें तो बुद्धिमान होते हैं।
इसका स्वामी बुध बुद्धि, वाणी, व्यापार और शिक्षा का कारक है, और यहाँ चंद्रमा वाले जातकों की पहली दशा इसी की होती है।
चारों पद
- पद 1 · वृश्चिक 16° 40′ – वृश्चिक 20° · धनु नवांश · नामाक्षर: नो
- पद 2 · वृश्चिक 20° – वृश्चिक 23° 20′ · मकर नवांश · नामाक्षर: या
- पद 3 · वृश्चिक 23° 20′ – वृश्चिक 26° 40′ · कुम्भ नवांश · नामाक्षर: यी
- पद 4 · वृश्चिक 26° 40′ – धनु 0° · मीन नवांश · नामाक्षर: यू
अनुकूलता
गुण मिलान के अनुसार सबसे अनुकूल नक्षत्र हैं मघा, अनुराधा, आश्लेषा, चित्रा, और धनिष्ठा।
सबसे कम अनुकूल हैं पूर्वा भाद्रपद, पुनर्वसु, और आर्द्रा।
मध्य पदों के लिए 36 गुण के अष्टकूट से निकाला गया; आपके सटीक पद और पूरी कुंडली इसे बदल सकते हैं।
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शिशु नाम