नक्षत्र
मघा नक्षत्र
मघा पितरों का सिंहासन है: गरिमामय, स्वाभिमानी और उदार, परंपरा और वंश का सम्मान करने वाला।
| विस्तार | सिंह 0° – सिंह 13° 20′ |
|---|---|
| स्वामी ग्रह | केतु |
| देवता | पितर |
| प्रतीक | राजसिंहासन |
| गण | राक्षस |
| योनि (पशु) | मूषक |
| नाड़ी | अंत्य (कफ) |
| राशि | सिंह |
| रत्न (स्वामी का) | लहसुनिया |
मघा का स्वभाव
मघा पितरों का सिंहासन है: गरिमामय, स्वाभिमानी और उदार, परंपरा और वंश का सम्मान करने वाला। इसके जातकों में स्वाभाविक अधिकार और नेतृत्व तथा सम्मान की प्रबल भावना होती है।
इसका स्वामी केतु वैराग्य, अंतर्ज्ञान, अध्यात्म और पूर्व कर्म का कारक है, और यहाँ चंद्रमा वाले जातकों की पहली दशा इसी की होती है।
चारों पद
- पद 1 · सिंह 0° – सिंह 3° 20′ · मेष नवांश · नामाक्षर: मा
- पद 2 · सिंह 3° 20′ – सिंह 6° 40′ · वृषभ नवांश · नामाक्षर: मी
- पद 3 · सिंह 6° 40′ – सिंह 10° · मिथुन नवांश · नामाक्षर: मू
- पद 4 · सिंह 10° – सिंह 13° 20′ · कर्क नवांश · नामाक्षर: मे
अनुकूलता
गुण मिलान के अनुसार सबसे अनुकूल नक्षत्र हैं पूर्वा फाल्गुनी, ज्येष्ठा, उत्तरा फाल्गुनी, शतभिषा, और मूल।
सबसे कम अनुकूल हैं रेवती, उत्तराषाढ़ा, और श्रवण।
मध्य पदों के लिए 36 गुण के अष्टकूट से निकाला गया; आपके सटीक पद और पूरी कुंडली इसे बदल सकते हैं।
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