नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा सही प्रयास से स्थायी विजय देता है।
| विस्तार | धनु 26° 40′ – मकर 10° |
|---|---|
| स्वामी ग्रह | सूर्य |
| देवता | विश्वेदेव |
| प्रतीक | हाथी दाँत |
| गण | मनुष्य |
| योनि (पशु) | नकुल |
| नाड़ी | अंत्य (कफ) |
| राशि | धनु और मकर |
| रत्न (स्वामी का) | माणिक्य (रूबी) |
उत्तराषाढ़ा का स्वभाव
उत्तराषाढ़ा सही प्रयास से स्थायी विजय देता है। इसके जातक सिद्धांतवादी, धैर्यवान, ज़िम्मेदार और न्यायप्रिय होते हैं, जिनका नेतृत्व धीरे-धीरे बढ़कर सम्मान पाता है।
इसका स्वामी सूर्य आत्मा, पिता, अधिकार और जीवनशक्ति का कारक है, और यहाँ चंद्रमा वाले जातकों की पहली दशा इसी की होती है।
चारों पद
- पद 1 · धनु 26° 40′ – मकर 0° · धनु नवांश · नामाक्षर: भे
- पद 2 · मकर 0° – मकर 3° 20′ · मकर नवांश · नामाक्षर: भो
- पद 3 · मकर 3° 20′ – मकर 6° 40′ · कुम्भ नवांश · नामाक्षर: जा
- पद 4 · मकर 6° 40′ – मकर 10° · मीन नवांश · नामाक्षर: जी
अनुकूलता
गुण मिलान के अनुसार सबसे अनुकूल नक्षत्र हैं पूर्वाषाढ़ा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद, हस्त, और आर्द्रा।
सबसे कम अनुकूल हैं रोहिणी, मघा, और आश्लेषा।
मध्य पदों के लिए 36 गुण के अष्टकूट से निकाला गया; आपके सटीक पद और पूरी कुंडली इसे बदल सकते हैं।
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शिशु नाम