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नई कुंडली

नक्षत्र

मूल नक्षत्र

मूल, यानी जड़, चीज़ों की तह तक जाता है।

विस्तारधनु 0° – धनु 13° 20′
स्वामी ग्रहकेतु
देवतानिऋति
प्रतीकजड़ों का गुच्छा
गणराक्षस
योनि (पशु)श्वान
नाड़ीआदि (वात)
राशिधनु
रत्न (स्वामी का)लहसुनिया

मूल का स्वभाव

मूल, यानी जड़, चीज़ों की तह तक जाता है। इसके जातक खोजी, दार्शनिक और अन्वेषक होते हैं, सत्य पाने के लिए जो काम न करे उसे तोड़ने से नहीं डरते।

इसका स्वामी केतु वैराग्य, अंतर्ज्ञान, अध्यात्म और पूर्व कर्म का कारक है, और यहाँ चंद्रमा वाले जातकों की पहली दशा इसी की होती है।

चारों पद

अनुकूलता

गुण मिलान के अनुसार सबसे अनुकूल नक्षत्र हैं पूर्वाषाढ़ा, चित्रा, विशाखा, उत्तराषाढ़ा, और रेवती।

सबसे कम अनुकूल हैं मृगशिरा, अश्विनी, और उत्तरा फाल्गुनी।

मध्य पदों के लिए 36 गुण के अष्टकूट से निकाला गया; आपके सटीक पद और पूरी कुंडली इसे बदल सकते हैं।

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शिशु नाम

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