नक्षत्र
विशाखा नक्षत्र
विशाखा उद्देश्य का नक्षत्र है: दृढ़, महत्वाकांक्षी और लक्ष्य पूरा होने तक उस पर केंद्रित।
| विस्तार | तुला 20° – वृश्चिक 3° 20′ |
|---|---|
| स्वामी ग्रह | गुरु |
| देवता | इंद्र और अग्नि |
| प्रतीक | तोरण द्वार |
| गण | राक्षस |
| योनि (पशु) | व्याघ्र |
| नाड़ी | अंत्य (कफ) |
| राशि | तुला और वृश्चिक |
| रत्न (स्वामी का) | पुखराज |
विशाखा का स्वभाव
विशाखा उद्देश्य का नक्षत्र है: दृढ़, महत्वाकांक्षी और लक्ष्य पूरा होने तक उस पर केंद्रित। इसके जातक ऊर्जावान और बड़ी उपलब्धि में सक्षम होते हैं, और लगन को धैर्य से संतुलित करना सीखते हैं।
इसका स्वामी गुरु ज्ञान, संतान, धन और सौभाग्य का कारक है, और यहाँ चंद्रमा वाले जातकों की पहली दशा इसी की होती है।
चारों पद
- पद 1 · तुला 20° – तुला 23° 20′ · मेष नवांश · नामाक्षर: ती
- पद 2 · तुला 23° 20′ – तुला 26° 40′ · वृषभ नवांश · नामाक्षर: तू
- पद 3 · तुला 26° 40′ – वृश्चिक 0° · मिथुन नवांश · नामाक्षर: ते
- पद 4 · वृश्चिक 0° – वृश्चिक 3° 20′ · कर्क नवांश · नामाक्षर: तो
अनुकूलता
गुण मिलान के अनुसार सबसे अनुकूल नक्षत्र हैं धनिष्ठा, चित्रा, मूल, शतभिषा, और भरणी।
सबसे कम अनुकूल हैं उत्तरा भाद्रपद, रोहिणी, और रेवती।
मध्य पदों के लिए 36 गुण के अष्टकूट से निकाला गया; आपके सटीक पद और पूरी कुंडली इसे बदल सकते हैं।
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शिशु नाम